पत्नी की याद में 89 साल के केदार कोश्यारी ने बना दिया मंदिर, रोज करते हैं पूजा, इस प्रेम कहानी पर कौन न हो जाए फिदा!

हर सुबह और शाम, केदार सिंह उसी प्यार और श्रद्धा के साथ उनकी आरती करते हैं, जैसे लक्ष्मी देवी आज भी उनके साथ हों। वे उनसे बातें करते हैं, अपने दिन की हर छोटी-बड़ी बात साझा करते हैं… मानो रिश्ता आज भी उतना ही जीवित हो, जितना पहले था

अपडेटेड Apr 28, 2026 पर 4:11 PM
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Uttarakhand Wife Temple: पत्नी की याद में 89 साल के केदार कोश्यारी ने बना दिया मंदिर, रोज करते हैं पूजा

उत्तराखंड के बागेश्वर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो दिल को छू जाती है और प्यार के मायने फिर से समझा जाती है। यहां एक बुजुर्ग पति ने अपनी दिवंगत पत्नी की यादों को सिर्फ दिल में ही नहीं, बल्कि अपने घर के एक मंदिर में हमेशा के लिए बसा लिया है।

Local18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कपकोट क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाले 89 साल के पूर्व सैनिक केदार सिंह कोश्यारी ने अपनी पत्नी लक्ष्मी देवी के लिए एक मंदिर बनवाया है। इस मंदिर में उनकी आदमकद मूर्ति स्थापित है- लेकिन केदार सिंह के लिए ये सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनकी जीवनसंगिनी की मौजूदगी का एहसास है।

हर सुबह और शाम, केदार सिंह उसी प्यार और श्रद्धा के साथ उनकी आरती करते हैं, जैसे लक्ष्मी देवी आज भी उनके साथ हों। वे उनसे बातें करते हैं, अपने दिन की हर छोटी-बड़ी बात साझा करते हैं… मानो रिश्ता आज भी उतना ही जीवित हो, जितना पहले था।


1962 में शुरू हुई थी प्रेम कहानी

दोनों की प्रेम कहानी साल 1962 में शुरू हुई थी। जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, दूरियां भी आईं- जब केदार सिंह सेना में देश की सेवा करते हुए दूर सीमाओं पर तैनात रहे। लेकिन इन सबके बावजूद, उनके रिश्ते की डोर कभी कमजोर नहीं पड़ी।

फिर एक दिन, 7 दिसंबर 2019 को, एक शादी समारोह के दौरान लक्ष्मी देवी ने अचानक इस दुनिया को अलविदा कह दिया। ये सदमा केदार सिंह के लिए बेहद गहरा था। वे अंदर से टूट गए… लेकिन उनका प्यार नहीं टूटा।

2020 में बनाया पत्नी का मंदिर

पत्नी के जाने के बाद भी उन्होंने अपने रिश्ते को खत्म नहीं होने दिया। साल 2020 में उन्होंने लक्ष्मी देवी की मूर्ति बनवाई और उसे अपने घर में एक मंदिर बना कर उसमें स्थापित किया। तब से हर दिन, हर पल, वे उसी अपनत्व और प्रेम के साथ उनका साथ निभा रहे हैं।

केदार सिंह की अपनी कोई संतान नहीं है। वे अपने भाई के परिवार के साथ रहते हैं, जो उनकी देखभाल करता है। लेकिन उनके दिल का सबसे बड़ा सहारा आज भी उनकी पत्नी की यादें हैं- वो यादें, जो उन्हें जीने की वजह देती हैं।

आज के इस तेज भागते दौर में, जहां रिश्ते अक्सर वक्त और हालात के आगे कमजोर पड़ जाते हैं, केदार सिंह और लक्ष्मी देवी की ये कहानी सिखाती है कि सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता। न दूरी उसे कम कर पाती है, न ही समय… और न ही मृत्यु।

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