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मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर पड़ेगा भीषण असर! गरीबी के दलदल में धंसने की कगार पर 25 लाख लोग; UNDP की चेतावनी

UNDP Report On Poverty: भारत अपनी जरूरत का 45% उर्वरक पश्चिम एशिया से मंगाता है। घरेलू यूरिया उत्पादन भी आयातित गैस पर निर्भर है। अब खरीफ के फसल की बुआई शुरू होने वाली है। अगर सप्लाई बाधित रही, तो यूरिया का मौजूदा 61 लाख टन का स्टॉक पर्याप्त नहीं होगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और खाद्य असुरक्षा पैदा होगी

Abhishek Guptaअपडेटेड Apr 14, 2026 पर 12:30 PM
मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर पड़ेगा भीषण असर! गरीबी के दलदल में धंसने की कगार पर 25 लाख लोग; UNDP की चेतावनी
युद्ध के कारण ईंधन, माल ढुलाई और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है

UNDP Report: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष और तनाव केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत के आम आदमी की जेब और थाली तक पहुंचने वाला है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की ताजा रिपोर्ट 'मिलिट्री एस्केलेशन इन द मिडिल ईस्ट' ने भारत के भविष्य को लेकर एक डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध के कारण भारत के करीब 25 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं।

गरीबी का बढ़ता साया

UNDP ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि युद्ध के कारण ईंधन, माल ढुलाई और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है। भारत में गरीबी बढ़ने का अनुमान पहले 4 लाख था, जो युद्ध की भीषणता के कारण अब 25 लाख तक पहुंच गया है। युद्ध के बाद भारत की गरीबी दर 23.9% से बढ़कर 24.2% होने का अनुमान है। UNDP का मानना है कि दक्षिण एशिया इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, जहां कुल 80 लाख लोग गरीबी का शिकार हो सकते हैं।

खेती और भोजन पर बड़ा संकट

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