West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान होते ही निर्वाचन आयोग (ECI) एक्शन मोड में आ गया है। निर्वाचन आयोग ने सोमवार (16 मार्च) को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता को पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया। गुप्ता को वर्तमान DGP पीयूष पांडे की जगह बंगाल का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार को भी हटा दिया है। उनके स्थान पर अजय कुमार नंद को कोलकाता पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है। चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद अधिकारियों को हटाने का फैसला किया गया।
इन अधिकारियों का हुआ तबादला
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार को सिद्ध नाथ गुप्ता (IPS -1992) को पुलिस महानिदेशक (DG) और IGP यानी पुलिस महानिरीक्षक (प्रभारी) नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
जबकि नटराजन रमेश बाबू (IPS-1991) को करेक्शनल सर्विसेज़ का महानिदेशक (DG) नियुक्त किया गया है। इसके अलावा चुनाव आयोग ने अजय मुकुंद रानाडे (IPS-1995) को ADG और IGP (लॉ एंड ऑर्डर) एवं अजय कुमार नंद (IPS-1996) को कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात करने का आदेश दिया।
अधिकारी ने आगे बताया कि आयोग ने आदेशों पर तत्काल अमल का निर्देश दिया। चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों को हटाया गया है उन्हें चुनाव समाप्त होने तक किसी भी चुनाव संबंधी कार्य में तैनात नहीं किया जाए।
मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी हटाया
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के महज कुछ ही घंटों बाद निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी सरकार के दो शीर्ष अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया। इनमें मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती भी शामिल हैं। आयोग ने 1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी दुष्यंत नरियाला को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया। आयोग ने कहा कि नंदिनी चक्रवर्ती को चुनाव संबंधी कार्यों से दूर रखा जाएगा।
आयोग ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना को भी उनके पद से हटा दिया। आयोग ने रविवार रात राज्य सरकार को भेजे एक पत्र में 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों की प्रधान सचिव नियुक्त करने का निर्देश दिया।
आयोग ने कहा कि राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। आयोग ने कहा निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। पश्चिम बंगाल में यह प्रशासनिक फेरबदल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा राज्य में जारी SIR को लेकर आयोग की लगातार आलोचना के मद्देनजर किया गया।
राज्य के राजनीतिक हलकों के कुछ वर्गों का मानना है कि यह कदम चुनावों के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा। जबकि मतगणना चार मई को होगी।