Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों पर पूरे देश की निगाहें जमी हुई हैं। यहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच की तीखी घमासान ने परिणामों को लेकर सबकों शंका में डाल दिया है। आज 4 मई को बाकी राज्यों के साथ यहां के चुनावी परिणाम भी घोषित होने जा रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या नतीजे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत कर प्रदेश में पहली बार भाजपा को जीत दिलाते हैं या ममता अपना किला बचाने में एक बार फिर कामयाब रहती हैं।
रिकॉर्ड मतदान: सत्ता विरोधी लहर या समर्थन?
इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव में 92-93% का असाधारण मतदान दर्ज किया गया है। यह भारतीय विधानसभा चुनावों के इतिहास में सबसे अधिक भागीदारी में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतना भारी मतदान सत्ता विरोधी लहर, सत्तारूढ़ दल के लिए मजबूत समर्थन या फिर अत्यधिक राजनीतिक ध्रुवीकरण का संकेत हो सकता है। सभी चरणों में मतदान 90% से ऊपर रहा।
फाल्टा सीट: क्या यही तय करेगी अगली सरकार?
आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है, लेकिन आज सिर्फ 293 सीटों के रुझान या नतीजे आएंगे। वोटिंग के दौरान गंभीर अनियमितताओं और डराने-धमकाने के आरोपों के बाद फाल्टा विधानसभा सीट पर पूरे मतदान को रद्द कर दिया गया है। यहां अब 21 मई को दोबारा वोटिंग होगी और नतीजे 24 मई को आएंगे। अगर मुकाबला बहुत करीबी होता है, तो सरकार बनाने की चाबी फाल्टा सीट के पास हो सकती है। वैसे पश्चिम बंगाल चुनावों के पिछले इतिहास पर नजर डालें तो लोगों ने मन बना कर किसी न किसी एक दल को पूर्ण बहुमत तक जरूर पहुंचाया है।
एग्जिट पोल्स में उलझा मुकाबला
एग्जिट पोल्स ने किसी एक तरफ स्पष्ट रुझान देने के बजाय मुकाबले को और अधिक अनिश्चित बना दिया है। कुछ एजेंसियां भाजपा को बढ़त या बहुमत दे रही हैं, जो राज्य में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है। अन्य एजेंसियां टीएमसी की वापसी या दोनों के बीच कांटे की टक्कर का दावा कर रही हैं। एक त्रिशंकु विधानसभा की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। हालांकि ममता बनर्जी ने इन सभी पोल को खारिज करते हुए अपनी बड़ी जीत का दावा किया है।
पश्चिम बंगाल में नतीजों के 4 संभावित सियासी परिदृश्य
बीजेपी को बहुमत: अगर भाजपा 148 का आंकड़ा पार करती है, तो यह बंगाल में उसकी पहली सरकार होगी और पूर्वी भारत में एक बड़ा वैचारिक विस्तार माना जाएगा।
टीएमसी की वापसी: अगर ममता बनर्जी बहुमत हासिल करती हैं, तो यह उनकी कल्याणकारी योजनाओं और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति की बड़ी जीत होगी।
त्रिशंकु विधानसभा: अगर कोई भी दल 148 के आंकड़े तक नहीं पहुंचता, तो गठबंधन की राजनीति शुरू होगी। यहां छोटे दल और निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं।
नतीजों में देरी: फाल्टा सीट पर पुनर्मतदान और कम अंतर वाली सीटों पर रिकाउंटिंग की मांग की वजह से सरकार गठन की प्रक्रिया में कुछ दिन लग सकते हैं।