Get App

Bengal News: बंगाल चुनाव से पहले राज्यपाल का बड़ा फैसला, अब सरकारी कागजों पर 'भवदीय' की जगह लिखा होगा 'वंदे मातरम'

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने अपने पत्रों के अंत में 'भवदीय' के स्थान पर 'वंदे मातरम' लिखने का निर्णय लिया है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस प्रतिष्ठित रचना के प्रति श्रद्धा के प्रतीक के रूप में 'वंदे मातरम' को अपने जीवन में आत्मसात करें

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jan 15, 2026 पर 4:06 PM
Bengal News: बंगाल चुनाव से पहले राज्यपाल का बड़ा फैसला, अब सरकारी कागजों पर 'भवदीय' की जगह लिखा होगा 'वंदे मातरम'
West Bengal News: बंगाल के गवर्नर ने ऑफिशियल चिट्ठियों में ‘भवदीय’ की जगह ‘वंदे मातरम’ लिखने का फैसला किया है

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने बुधवार (14 जनवरी) को कहा कि वह अपने ऑफिशियल चिट्ठियों में परंपरागत रूप से इस्तेमाल होने वाले 'भवदीय' के स्थान पर 'वंदे मातरम' लिखेंगे। लोक भवन के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X हैंडल के माध्यम से इस फैसले के बारे में जानकारी दी गई। एक अधिकारी ने कहा कि यह कदम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' की स्थायी विरासत और सांस्कृतिक महत्व से प्रेरित है।

अधिकारी ने कहा, "राज्यपाल ने अपने पत्रों के अंत में 'भवदीय' के स्थान पर 'वंदे मातरम' लिखने का निर्णय लिया है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस प्रतिष्ठित रचना के प्रति श्रद्धा के प्रतीक के रूप में 'वंदे मातरम' को अपने जीवन और दैनिक गतिविधियों में यथासंभव शामिल और आत्मसात करें।"

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के अनुसार, ऐसे प्रयास गीत से जुड़ी एकता, देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव के मूल्यों को बरकरार रखने में सहायक होंगे। बंगाल में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले यह फैसला प्रशासनिक बदलाव भर नहीं है। यह बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रवाद और चुनावी माहौल से जुड़ा एक अहम संकेत भी है।

बंगाल की राजनीति में सांस्कृतिक अस्मिता और बंगाल के कद्दावर हस्तियां हमेशा एक अहम मुद्दा रहे हैं। राज्यपाल दफ्तर की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह फैसला बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। लोक भवन के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी इस निर्णय को शेयर किया गया है। इस पर अब राजनीतिक भी शुरू हो गई है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें