ओडिशा के बालासोर जिले में एक अफवाह ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। भीड़ ने गलती से आए दो सरकारी अधिकारियों को बच्चा चोर समझ लिया और उनके साथ मारपीट कर दी। इस मामले में पुलिस ने अब तक 72 लोगों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, ये दोनों अधिकारी पश्चिम बंगाल से स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) ड्यूटी पर तैनात थे। बुधवार को वे पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के नयाग्राम की ओर जा रहे थे, लेकिन रास्ता भटककर ओडिशा के बालासोर जिले में पहुंच गए।
स्थानीय लोगों को उनकी मौजूदगी पर शक हुआ। कुछ लोगों ने अफवाह फैला दी कि वे बच्चा चोर हैं। देखते ही देखते भीड़ इकट्ठा हो गई और दोनों अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। इतना ही नहीं, उन्हें कुछ समय के लिए रोककर भी रखा गया।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों अधिकारियों को भीड़ से छुड़ाया। हालांकि, पुलिस को भी वहां विरोध का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने पुलिस के साथ बहस और हाथापाई भी की।
इस घटना को लेकर पुलिस ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं और जांच जारी है।
बालासोर के अतिरिक्त एसपी निरंजन बेहरा ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी व्यक्ति पर शक हो तो खुद कार्रवाई न करें, बल्कि तुरंत पुलिस को सूचना दें। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में 112 आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि बिना पुख्ता जानकारी के अफवाह फैलाना या उस पर कार्रवाई करना गंभीर कानूनी अपराध है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की है।
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर विवाद और बवाल
SIR (Special Intensive Revision) का मतलब है 'विशेष गहन पुनरीक्षण'। यह भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की तरफ से राज्य की वोटर लिस्ट को पूरी तरह से शुद्ध और अपडेट करने के लिए चलाया गया एक बड़ा अभियान है। पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले काफी चर्चा में है।
SIR एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें चुनाव आयोग की तरफ से BLO घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करता है। पश्चिम बंगाल में आखिरी बार ऐसा अभियान साल 2002-2004 में चलाया गया था। लगभग 22 साल बाद इसे दोबारा करने का मुख्य उद्देश्य उन मतदाताओं को लिस्ट से हटाना है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं, और नए पात्र वोटरों के नाम जोड़ना है।
पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया 4 नवंबर 2025 से शुरू हुई थी। चुनाव आयोग के निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी फाइनल वोटर लिस्ट 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित होनी तय है।
इस बार प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर करीब 530 न्यायिक अधिकारियों (जज) को भी तैनात किया गया है, जो वोटर लिस्ट से जुड़ी शिकायतों और दावों का निपटारा कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान लाखों ऐसे नाम हटाए गए हैं जो 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' या गलत मैपिंग के दायरे में थे।