Gujarat UCC Bill 2026: गुजरात UCC बिल में क्या है खास? जानिए क्यों AIMPLB विधेयक को कोर्ट में देगी चुनौती

Gujarat UCC Bill 2026: गुजरात भले ही यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026 (UCC) लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया हो, लेकिन विपक्षी पार्टियां इस बिल का अब भी विरोध कर रही हैं। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि विधेयक को पेश करना “राजनीतिक रूप से प्रेरित” है।

अपडेटेड Apr 04, 2026 पर 11:46 AM
Story continues below Advertisement
गुजरात UCC बिल में क्या है खास? जानिए क्यों AIMPLB विधेयक को कोर्ट में देगी चुनौती

Gujarat UCC Bill 2026: गुजरात भले ही यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026 (UCC) लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया हो, लेकिन विपक्षी पार्टियां इस बिल का अब भी विरोध कर रही हैं। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि विधेयक को पेश करना “राजनीतिक रूप से प्रेरित” है। वहीं, अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने शुक्रवार को बिल को "असंवैधानिक" करार दिया और कहा कि वह इसे गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।

बता दें कि गुजरात विधानसभा ने 24 अप्रैल को यूसीसी बिल पारित किया था, जिसका उद्देश्य धर्म या समुदाय की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को नियंत्रित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है।

लेकिन अब इस बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। कांग्रेस विधायक शैलेश परमार ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित कानून में गुजरात में रह रहे अन्य राज्यों के लोगों को भी शामिल किया जाएगा या नहीं। उन्होंने कहा, "लिव-इन रिलेशनशिप के मुद्दे पर स्पष्टता का अभाव है और यह बिल नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से टकराना नहीं चाहिए।"


यूसीसी बिल 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' 

वहीं, राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि विधेयक को पेश करना “राजनीतिक रूप से प्रेरित” है। चावड़ा ने पूछा कि विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले न्यायमूर्ति रंजना देसाई पैनल की रिपोर्ट विधायकों को पढ़ने के लिए क्यों नहीं दी गई।

बिल को हाई कोर्ट में चुनौती देगा AIMPLB

दूसरी तरफ अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने शुक्रवार को बिल को ‘ ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए कहा कि वह इसे कोर्ट में चुनौती देंगे। बोर्ड ने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से मुसलमानों पर बहुसंख्यकवादी सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंडों को थोपने का एक प्रयास है, और यह "अस्वीकार्य" है।

UCC बिल में क्या है खास?

  • UCC विधेयक के कोई भी प्रावधान अनुसूचित जनजातियों (ST) के सदस्यों पर लागू नहीं होंगे।
  • विधेयक में विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन करने का प्रस्ताव है, जिसका पालन न करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
  • सभी लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और ऐसे संबंधों की समाप्ति की सूचना देना भी आवश्यक होगा।
  • लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुआ बच्चा पूरी तरह वैध (कानूनी) माना जाएगा। अगर कोई पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़ देता है, तो महिला मेंटेनेंस (भरण-पोषण) मांग सकती है।
  • इस बिल में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और जबरदस्ती या दबाव से किए गए विवाहों के लिए 7 साल तक की कैद की सजा हो सकती है। अदालती आदेश के अलावा किसी भी अन्य प्रकार के तलाक के लिए 3 साल तक की कैद की सजा हो सकती है।
  • तलाक के बाद अब कपल बिना किसी शर्त के दोबारा शादी कर सकते हैं, और कुछ समुदायों में प्रचलित हलाला प्रथा पर भी रोक लगाई गई है।

यह भी पढ़ें: ONGC Platform Fire: ONGC के मुंबई हाई प्लेटफॉर्म पर लगी भीषण आग, 10 कर्मचारी घायल, इमरजेंसी टीम मौके पर पहुंची

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।