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Shashi Tharoor: ईरान-US जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता से क्यों नाखुश हैं शशि थरूर? बताया 'शर्मनाक'

US-Iran Talks In Pakistan: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थता की पेशकश किए जाने पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने नाखुशी जताई है। उन्होंने कहा कि इसमें भारत को एक अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें दोनों पक्षों के साथ अपने अच्छे संबंधों का लाभ उठाकर एक शांति पहल शुरू करनी चाहिए

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Mar 26, 2026 पर 11:47 AM
Shashi Tharoor: ईरान-US जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता से क्यों नाखुश हैं शशि थरूर? बताया 'शर्मनाक'
US-Iran Talks In Pakistan: शशि थरूर ने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है, तो भारत का इससे कोई लेना-देना नहीं है

US-Iran Talks In Pakistan: सीनियर कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने गुरुवार (26 मार्च) को कहा है कि यह शर्मनाक है कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े मध्यस्थता प्रयासों में एक अहम भूमिका निभा रहा है। उनका तर्क है कि भारत को इसमें एक अग्रणी कूटनीतिक स्थिति अपनानी चाहिए थी। दरअसल, कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर अमेरिका एवं ईरान के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं।

थरूर ने कहा कि उन्होंने इस संघर्ष पर भारत सरकार के संयमित सार्वजनिक रुख का समर्थन इस उम्मीद में किया था कि नई दिल्ली इस मौके का इस्तेमाल शांति पहलों को आगे बढ़ाने के लिए करेगी। शशि थरूर ने कहा, "अभी, यह कहते हुए दुख हो रहा है कि हालात बहुत अच्छे नहीं दिख रहे हैं। यह हम सभी के लिए थोड़ा शर्मनाक है।"

उन्होंने कहा, "मैंने इस ईरान युद्ध पर सरकार के संयम और चुप्पी का समर्थन करने का एक कारण यह था कि मुझे उम्मीद थी कि सरकार इसका इस्तेमाल शांति स्थापित करने के लिए एक जगह बनाने और शांति के लिए एक अग्रणी आवाज बनने के लिए करेगी, जैसा कि PM मोदी ने अक्सर कहा है कि भारत को होना चाहिए।"

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, "लेकिन विडंबना यह है कि हम देख रहे हैं कि पाकिस्तान ही तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर मध्यस्थता के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। मैं इस बात पर खुश नहीं हो सकता।" थरूर ने कहा कि वह इस बात की वकालत करते रहे हैं कि भारत को संबंधित पक्षों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने के लिए अपने कूटनीतिक संबंधों का लाभ उठाना चाहिए।

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