जस्टिस यशवंत वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके चलते उन्हें हटाया जा सकता था। पिछले साल दिल्ली में उनके घर से भारी मात्रा में कैश मिलने के बाद वह विवादों में आ गए थे। हालांकि उस समय उन्होंने कहा था कि यह पैसा उनका नहीं है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा, लेकिन इस अचानक लिए गए फैसले की कोई वजह अपने पत्र में नहीं बताई।
अपने इस्तीफे में यशवंत वर्मी ने लिखा, “मैं आपके सम्मानित पद पर अपने फैसले की वजह का बोझ नहीं डालना चाहता, लेकिन गहरे दुख के साथ मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज पद से तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं।” यह पत्र 9 अप्रैल को लिखा गया था, जिसमें उन्होंने अपने फैसले के पीछे की कोई खास वजह नहीं बताई, लेकिन अपने दर्द और मजबूरी का जिक्र जरूर किया।
मिलती रहेगी पेंशन और दूसरी सुविधाएं
NDTV ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यशवंत वर्मा के इस्तीफा देने के बाद उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की प्रक्रिया अब खत्म हो जाएगी। इस्तीफे के बाद उन्हें हाई कोर्ट के जज के तौर पर मिलने वाली पेंशन और दूसरी सुविधाएं मिलेंगी। अगर उन्हें संसद के जरिए हटाया जाता, तो ये सभी फायदे नहीं मिलते।
यह पूरा मामला उनके आधिकारिक आवास (लुटियंस दिल्ली) में 14 मार्च 2025 को भारी मात्रा में कैश मिलने से जुड़ा है। उस समय वह दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे।
बताया गया कि भारी मात्रा में जला हुआ कैश सर्वेंट क्वार्टर के पास एक स्टोर रूम में मिला था। उस समय जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी भोपाल में मौजूद थे।
यशवंत वर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने या उनके परिवार के किसी सदस्य ने कभी भी उस स्टोर रूम में कोई कैश नहीं रखा। उन्होंने यह भी कहा था कि वह कमरा सभी के लिए खुला था, यानी वहां किसी का भी आना-जाना हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई थी 3 जजों की कमेटी
22 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की आंतरिक जांच के लिए तीन जजों की एक कमेटी बनाई थी। इसके बाद 4 मई को तीन वरिष्ठ जजों के इस पैनल ने अपनी रिपोर्ट उस समय के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को सौंप दी थी।
जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत वर्मा से दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायिक काम- जैसे केस की सुनवाई वापस ले लिया था।
उन्हें उनके मूल कोर्ट यानी इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया और वहां के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया गया कि उन्हें कोई भी न्यायिक काम न दिया जाए।
इतना ही नहीं, एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए कोर्ट ने उनके घर से बरामद बताई गई नकदी की तस्वीरें और वीडियो भी सार्वजनिक कर दिए थे।
लोकसभा में शुरू हुई महाभियोग की प्रक्रिया
पिछले साल जुलाई में यशवंत वर्मा को जज पद से हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अगस्त में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई।
इस साल की शुरुआत में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा था कि प्रक्रिया जारी है और सरकार कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।