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Yashwant Varma Case: जज कैश कांड में नया मोड़! महाभियोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जस्टिस यशवंत वर्मा

Yashwant Varma Case: इस साल मार्च में नई दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर जले हुए नोट मिलने के बाद से ही वे विवादों के केंद्र में हैं। साल मार्च में राष्ट्रीय राजधानी स्थित जस्टिस वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना हुई थी, जिसके बाद कथित तौर पर जली हुई कैश बरामद हुई। उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे। विवाद के बाद उन्हें इलाहबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jul 18, 2025 पर 10:14 AM
Yashwant Varma Case: जज कैश कांड में नया मोड़! महाभियोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जस्टिस यशवंत वर्मा
Yashwant Varma Case:  इस साल मार्च में नई दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर जले हुए नोट मिलने के बाद से ही वे विवादों के केंद्र में हैं

Yashwant Varma Cash Case: दिल्ली स्थित सरकारी आवास से भारी मात्रा में कैश बरामद होने के मामले में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने आंतरिक जांच पैनल की रिपोर्ट को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की गई हैइस साल मार्च में नई दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर जले हुए नोट मिलने के बाद से ही वे विवादों के केंद्र में हैंसाल मार्च में राष्ट्रीय राजधानी स्थित जस्टिस वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना हुई थी, जिसके बाद कथित तौर पर जली हुई कैश बरामद हुई। उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में जज थेविवाद के बाद उन्हें इलाहबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया

अपनी याचिका में जस्टिस वर्मा ने कहा है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। जस्टिस वर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई से वंचित कर दिया था।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार मानसून सत्र में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएगीसरकार कथित भ्रष्टाचार के मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सर्वदलीय सहमति बनाने का प्रयास करेगी

सूत्रों ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू विभिन्न दलों के नेताओं से बात कर रहे हैं, ताकि उन्हें तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा गठित तीन-सदस्यीय समिति की जस्टिस वर्मा के खिलाफ सौंपी गई रिपोर्ट के बाद उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के लिए राजी किया जा सके।

जस्टिस वर्मा ने खुद को निर्दोष बताया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने उन्हें दोषी ठहराया। विवाद के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर किए गए जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद जस्टिस खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महाभियोग प्रस्ताव की सिफारिश की।

होली की रात 14 मार्च 2025 को मध्य दिल्ली में जस्टिस वर्मा के बंगले पर फायर ब्रिगेड को बुलाया गया था। जब वे आग बुझा रहे थे तो कथित तौर पर एक आउटहाउस में कैश के जले हुए बंडल पाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 21 मई को राष्ट्रीय राजधानी में वर्मा के सरकारी आवास से कैश बरामद होने के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।

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