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योगी सरकार का बड़ा प्रस्ताव: वर्क फ्रॉम होम से लेकर नो व्हीकल डे तक, क्या बदल जाएगी यूपी की तस्वीर?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी औद्योगिक इकाइयों, आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स के कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं कराने का आदेश दिया गया है।

Edited By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड May 14, 2026 पर 3:32 PM
योगी सरकार का बड़ा प्रस्ताव: वर्क फ्रॉम होम से लेकर नो व्हीकल डे तक, क्या बदल जाएगी यूपी की तस्वीर?
योगी सरकार का बड़ा प्रस्ताव: वर्क फ्रॉम होम से लेकर नो व्हीकल डे तक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी औद्योगिक इकाइयों, आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स के कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं कराने का आदेश दिया गया है। यह कदम बढ़ते ईंधन बचत अभियान के तहत लिया गया है, जिसका कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। सुनने में यह प्रस्ताव महत्वाकांक्षी जरूर लगता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में असरदार साबित होगा?

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद आई है जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के मद्देनजर नागरिकों और कंपनियों से अनावश्यक ईंधन खपत कम करने का आग्रह किया था।

यह प्रस्ताव उन कई घटनाक्रमों के बाद आया है जिन्होंने सामूहिक रूप से घर से काम करने की राष्ट्रीय बहस को फिर से हवा दी है, जिनमें Nascent Information Technology Employees Senate द्वारा श्रम मंत्रालय को लिखा गया एक औपचारिक पत्र भी शामिल है, जिसमें आईटी और आईटी- इनेबल्ड सर्विसेज में रिमोट वर्क को बढ़ावा देने के लिए सरकारी एजवाइजरी जारी करने का अनुरोध किया गया था।

योगी आदित्यनाथ  का यह आदेश इससे भी आगे जाता है। इसमें मंत्रियों के काफिले को 50 प्रतिशत तक कम करने, सरकारी बैठकों को ऑनलाइन करने, दफ्तरों के लिए अलग-अलग समय लागू करने और हफ्ते में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ रखने जैसे सुझाव शामिल हैं।

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