कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने युवाओं के करियर को उड़ान देने वाली प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) को लेकर एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब देश की टॉप कंपनियों में काम सीखने और हर महीने स्टाइपेंड पाने का मौका उन छात्रों को भी मिलेगा जो अभी अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। आपको बता दें कि भारत सरकार ने देश के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। PMIS के पायलट चरण के पात्रता मानदंडों में और विस्तार कर दिया गया है। अब इस योजना के तहत ग्रैजुएशन (UG) और पोस्ट ग्रैजुएशन (PG) कार्यक्रमों के अंतिम वर्ष (Final Year) के स्टूडेंट्स भी आवेदन कर सकेंगे। इससे पहले यह मौका मुख्य रूप से अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके युवाओं के लिए था, लेकिन अब छात्र अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी करने से पहले ही इंडस्ट्री का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
PM इंटर्नशिप स्कीम: क्या हैं नए बदलाव?
शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के साथ परामर्श के बाद किए गए इस बदलाव के तहत कुछ नई शर्तें जोड़ी गई हैं। इन्हें नीचे देखा जा सकता है-
स्टाइपेंड और फायदे: हर महीने मिलेंगे ₹9000
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत चुने गए युवाओं को भारत सरकार और कंपनियों के सहयोग से कई लाभ मिलते हैं। इंटर्नशिप के दौरान प्रशिक्षु को प्रति माह कम से कम 9,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। देश की 300 से अधिक दिग्गज कंपनियां इस योजना का हिस्सा हैं, जहां विभिन्न क्षेत्रों में काम सीखने का अवसर मिलता है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों को पूरा करती है, जिसका उद्देश्य छात्रों में टीम वर्क, समस्या-समाधान और पेशेवर संस्कृति को विकसित करना है।
आयु सीमा: आवेदक की आयु 18 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
शैक्षणिक स्थिति: या तो पढ़ाई पूरी कर चुके हों या स्नातक/स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष में हों।
पोर्टल: आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
योग्य और इच्छुक युवा योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी रुचि के अनुसार इंटर्नशिप के अवसर तलाश सकते हैं:
आधिकारिक वेबसाइट: www.pminternship.mca.gov.in
पायलट चरण का तीसरा दौर जारी
फिलहाल इस योजना का पायलट चरण चल रहा है और इसका तीसरा दौर शुरू हो चुका है। कंपनियां लगातार अपनी जरूरतों के हिसाब से पोर्टल पर इंटर्नशिप के अवसर पोस्ट कर रही हैं। मंत्रालय का मानना है कि पढ़ाई के दौरान ही कॉर्पोरेट जगत का अनुभव मिलने से छात्रों के लिए डिग्री के बाद नौकरी पाना आसान हो जाएगा और अकादमिक शिक्षा व इंडस्ट्री की अपेक्षाओं के बीच का अंतर कम होगा।