UP Assistant Professor Exam: यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द, 'पेपर लीक रैकेट' का खुलासा होने पर योगी सरकार का फैसला

Uttar Pradesh Assistant Professor Exam: पिछले साल 16 और 17 अप्रैल, 2025 को हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द कर दी गई है। योगी सरकार ने 'गंभीर अनियमितताओं' के बाद परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया है। यूपी STF ने हाल ही में 'पेपर लीक रैकेट' का खुलासा किया था

अपडेटेड Jan 07, 2026 पर 9:16 PM
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UP Assistant Professor Exam: योगी सरकार ने पेपर लीक के कारण UP में असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया है

Uttar Pradesh Assistant Professor Exam 2025: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले साल अप्रैल में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को गड़बड़ियों के कारण रद्द कर दिया है। बताया जा रहा है कि 'पेपर लीक रैकेट' का खुलासा होने के बाद यह कार्रवाई की गई है। बुधवार को राज्य सरकार की तरफ से जारी एक बयान के अनुसार, पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अप्रैल 2025 में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा से संबंधित गड़बड़ियों, धांधली और अवैध पैसों के लेन-देन के बारे में शिकायतें मिली थीं।

आधिकारिक प्रेस रिलीज में बताया गया कि यह फैसला उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की विस्तृत जांच के बाद लिया गया। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट मुताबिक, STF ने क्वेश्चन पेपर लीक करने और बेचने वाले एक गैंग का पर्दाफाश किया है। बयान में कहा गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोपनीय जांच के आदेश दिए थे।

कहा गया है, "16 और 17 अप्रैल, 2025 को आयोजित परीक्षा को इच्छुक उम्मीदवारों के भविष्य की रक्षा करने और राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रद्द कर दिया गया है।" इसके बाद, STF ने पिछले साल 20 अप्रैल को तीन आरोपियों महबूब अली, वैजनाथ पाल और विनय पाल को असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के लिए फर्जी क्वेश्चन पेपर बनाने और उम्मीदवारों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

यह परीक्षा राज्य में 16 और 17 अप्रैल को हुई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी महबूब अली उस समय आयोग के अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। बयान के अनुसार, इस मामले में एक केस दर्ज किया गया था। जांच की निष्पक्षता और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष से इस्तीफा देने को कहा गया था।

बयान में आगे कहा गया है कि पूछताछ के दौरान, आरोपी महबूब अली ने कबूल किया। उसने परीक्षा प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के क्वेश्चन पेपर हासिल किए थे। महबूब अली के कबूलनामे की पुष्टि STF ने गहन जांच और डेटा विश्लेषण के माध्यम से की।

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बयान के अनुसार, डेटा के मिलान से पता चला कि परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता किया गया था। इन तथ्यों के आधार पर, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया। योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया कि परीक्षा जल्द से जल्द पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाए।

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