सर्दियों में लकड़ी जलाना पड़ सकता है भारी, धुएं से बढ़ रहा मौत का रिस्क, जानें कैसे

सर्दियों में अलाव या घर के भीतर लकड़ी जलाकर गर्मी लेना आरामदायक जरूर लगता है, लेकिन नई रिसर्च ने इसके खतरों की ओर इशारा किया है। साइंस एडवांसेज में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, घरों में लकड़ी जलाना वायु प्रदूषण को बढ़ाता है और यह कई मामलों में समय से पहले होने वाली मौतों से भी जुड़ा पाया गया है

अपडेटेड Jan 25, 2026 पर 2:04 PM
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लकड़ी जलाने का असर सिर्फ उसी घर तक सीमित नहीं रहता।

ठंड के मौसम में जब तापमान तेजी से गिरता है, तो शरीर को गर्म रखने के लिए लोग अक्सर अलाव या अंगीठी का सहारा लेते हैं। गांव हो या शहर, सर्द रातों में जलती लकड़ी की आग लोगों को राहत और सुकून का एहसास कराती है। परिवार और पड़ोसियों के साथ आग के पास बैठना एक आम और पुरानी परंपरा भी मानी जाती है। लेकिन जिस गर्माहट को हम आराम और सुरक्षा से जोड़ते हैं, उसके पीछे छुपा खतरा अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालिया शोध और वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि घरों में जलने वाली लकड़ी से निकलने वाला धुआं सिर्फ वातावरण को ही नहीं, बल्कि हमारी सेहत को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

ये धुआं हवा में बेहद महीन कणों को बढ़ाता है, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। लंबे समय तक इसका असर दिल, फेफड़ों और पूरी श्वसन प्रणाली पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अब अलाव की गर्माहट को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

सर्दियों में हवा को सबसे ज्यादा कौन बिगाड़ रहा है?


नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुताबिक, सर्दियों में हवा में मौजूद PM2.5 प्रदूषण का करीब 22% हिस्सा सिर्फ घरों में लकड़ी जलाने से पैदा होता है। यानी ठंड के मौसम में यह प्रदूषण का सबसे बड़ा अकेला कारण बन चुका है।

लकड़ी का धुआं और दिल की दुश्मनी

लकड़ी जलने से निकलने वाला धुआं बेहद महीन कणों से भरा होता है, जो सांस के रास्ते सीधे शरीर में दाखिल हो जाते हैं। ये कण दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह असर जंगल की आग के धुएं से कम खतरनाक नहीं है।

घर की आग, हजारों जिंदगियों पर भारी

रिसर्च मॉडल्स बताते हैं कि अमेरिका में हर साल करीब 8,600 समय से पहले होने वाली मौतों का संबंध आवासीय लकड़ी जलाने से बने प्रदूषण से है। यह आंकड़ा दिखाता है कि समस्या कितनी गंभीर और अनदेखी की गई है।

धुआं घर में नहीं रुकता, शहरों तक पहुंचता है

लकड़ी जलाने का असर सिर्फ उसी घर तक सीमित नहीं रहता। हवा के साथ यह धुआं उपनगरों से बहकर घनी आबादी वाले शहरों तक पहुंच जाता है। भले ही शहरों में लकड़ी कम जलाई जाती हो, लेकिन बाहर से आया धुआं वहां की हवा को भी जहरीला बना देता है।

क्या है इससे बचने का रास्ता?

अच्छी खबर यह है कि समाधान मुश्किल नहीं है। ज्यादातर घर पूरी तरह लकड़ी पर निर्भर नहीं होते। अगर लकड़ी के स्टोव और फायरप्लेस की जगह आधुनिक, स्वच्छ और बिना जलने वाले हीटिंग विकल्प अपनाए जाएं, तो हवा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हो सकता है।

छोटा बदलाव, बड़ी राहत

अलाव की जगह सुरक्षित हीटिंग टूल्स अपनाकर न सिर्फ अपनी सेहत बचाई जा सकती है, बल्कि पूरे इलाके की हवा को भी साफ रखा जा सकता है। ठंड से बचाव जरूरी है, लेकिन जिंदगी की कीमत पर नहीं।

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