स्वेटर, कोट और अन्य ऊनी कपड़े ठंड के मौसम में गर्म और आरामदायक महसूस होते हैं, लेकिन इन्हें पहनते या धोते समय अक्सर छोटे-छोटे रोएं यानी पिलिंग उठने लगते हैं। यह समस्या तब होती है जब कपड़ों के रेशे आपस में रगड़ खाते हैं या किसी सतह जैसे बैग, कुर्सी, जैकेट या अन्य कपड़ों से टकराते हैं। इसके अलावा खराब गुणवत्ता वाला ऊन या ढीली बुनाई वाले कपड़े जल्दी पिलिंग का शिकार हो जाते हैं। गर्म पानी, हार्श डिटर्जेंट, या वॉशिंग मशीन में बहुत ज्यादा कपड़े डालने से भी रोएं बनते हैं। साथ ही, गीले या गर्म कपड़े पहनकर सोने से भी पिलिंग की संभावना बढ़ जाती है।
यह न केवल कपड़ों की सुंदरता को प्रभावित करता है, बल्कि उनकी उम्र भी घटा देता है। इसलिए सही देखभाल, हल्के डिटर्जेंट और उचित धोने-सुखाने के तरीकों का पालन करना बेहद जरूरी है।
रोएं बनने से बचने के आसान उपाय
गर्म कपड़ों को धोने से पहले हमेशा उल्टा कर दें। इससे कपड़े की ऊपरी सतह आपस में रगड़ नहीं खाएगी और रोएं कम बनेंगे।
ऊनी कपड़े मशीन की तेज रगड़ के लिए अनुकूल नहीं होते। इन्हें बाल्टी में हल्के लिक्विड डिटर्जेंट जैसे Ezee या Genteel में भिगोकर धीरे-धीरे धोएं।
गीले और भारी कपड़े सीधे हैंगर पर लटकाने से उनके रेशे खिंच जाते हैं और रूप बिगड़ जाता है। इन्हें हमेशा समतल जगह पर फैलाकर सुखाएं।
सीधे प्रेस करने के बजाय स्टीमर का उपयोग करें या कपड़े के ऊपर हल्का सूती रूमाल रखें। इससे ऊन की नरमी बनी रहती है और रोएं कम बनते हैं।
गर्म कपड़ों पर जम चुकी धूल या छोटे रोएं सॉफ्ट ब्रश से धीरे-धीरे निकालें। इससे कपड़े लंबे समय तक सुंदर और नया बने रहते हैं।
गर्म कपड़े प्लास्टिक बैग में बंद न करें। इसके बजाय सूती बैग या पुराने तकिए के कवर का इस्तेमाल करें। फिनाइल की गोलियां कपड़ों में नमी और कीड़े से बचाव करती हैं। इस तरह से संग्रहित कपड़े लंबे समय तक खराब नहीं होते और रोएं भी कम बनते हैं।