भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ी परंपरा है। दिन की शुरुआत हो या मेहमानों की आवभगत, चाय हर मौके पर खास होती है। लेकिन इस स्वाद भरे सफर में एक चीज है जो हमेशा पर्दे के पीछे रह जाती है – चाय की छलनी। रोजाना के इस्तेमाल से ये छोटी-सी छलनी धीरे-धीरे इतनी गंदी हो जाती है कि उसका काला रंग और जमी हुई परत उसे बदसूरत बना देती है। अक्सर लोग नई छलनी खरीदने का सोचते हैं, लेकिन जरूरत है सिर्फ थोड़ी सी देखभाल और सफाई की।
