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Crypto Exchanges vs Banks: क्रिप्टो एक्सचेंज और बैंकों की लड़ाई, अब इस मुद्दे पर बनी बात

Crypto Exchanges vs Banks: क्रिप्टो एक्सचेंजों और बैंकों के बीच लड़ाई के चलते इस साल जनवरी में क्लैरिटी एक्ट को वोटिंग के लिए लाने की कोशिश फेल हो गई थी। हालांकि अब इसका रास्ता साफ हो गया है। जानिए क्रिप्टो एक्सचेंजों और बैंकों के बीच विवाद की वजह क्या है और किस बात को लेकर समझौता हुआ है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 02, 2026 पर 8:50 AM
Crypto Exchanges vs Banks: क्रिप्टो एक्सचेंज और बैंकों की लड़ाई, अब इस मुद्दे पर बनी बात
इस साल की शुरुआत में क्लैरिटी एक्ट (Clarity Act) के नाम से क्रिप्टो बिल को वोटिंग के लिए लाने की कोशिश की गई थी।

Crypto Exchanges vs Banks: दिग्गज अमेरिकी क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस ग्लोबल इंक (Coinbase Global Inc) का कहना है कि स्टेबलकॉइन यील्ड से जुड़े एक अहम प्रावधान पर समझौता हो गया है। इससे अमेरिकी सीनेट में क्रिप्टो कानून को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है। क्रिप्टो एक्सचेंजों को स्टेबलकॉइन रखने पर ग्राहकों को रिवॉर्ड देने की मंजूरी दी जानी चाहिए या नहीं, इस मुद्दे पर विवाद के कारण इस साल की शुरुआत में यह कानून अटक गया था। बैंकों ने रिवॉर्ड पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, उनका कहना था कि इससे बैंकों से ताबड़तोड़ विदड्रॉल हो सकते हैं।

Crypto Exchanges vs Banks: क्या हुआ समझौता?

कॉइनबेस के चीफ पॉलिसी ऑफिसर फरयार शिरजाद (Faryar Shirzad) का कहना है कि आखिरकार बैंक रिवार्ड्स पर और अधिक प्रतिबंध लगाने में सफल रहे लेकिन क्रिप्टो एक्सचेंज ने वह चीज हासिल की, जो मायने रखती है- क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और नेटवर्क्स के वास्तविक इस्तेमाल के आधार पर रिवॉर्ड कमाने की अमेरिकियों की क्षमता। शिरजाद ने ये बातें X (पूर्व नाम Twitter) पर कहीं। अब समझौते के बाद क्रिप्टो मार्केट के स्ट्रक्चर से जुड़े कानून को सीनेट बैंकिंग कमेटी में वोटिंग के लिए आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह बिल डिजिटल एसेट इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्सों पर SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) और कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन की रेगुलेटरी अथॉरिटीज को स्पष्ट करेगा।

जनवरी में अटक गया था बिल

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