Repo Rate History: केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) हर दो महीने पर मौद्रिक नीतियों को रिव्यू करता है और फिर उसके बाद रेपो रेट का ऐलान होता है। आरबीआई के ऐलान में सिर्फ रेपो रेट का ही जिक्र नहीं होता है बल्कि इसके साथ ही मार्केट की नजर इनफ्लेशन और इकॉनमी को लेकर आरबीआई गवर्नर के बयान पर भी रहती है। फिलहाल रेपो रेट की बात करें तो पिछले 16 वर्षों में इसमें काफी उतार-चढ़ाव हुआ है और यह 5% से बढ़कर 8% पर पहुंचा जिससे लुढ़ककर यह 4% तक आया और फिर इसके बाद ऊपर जाने लगा।
