मौसम बदलते ही गर्मी ने धीरे-धीरे असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान बढ़ते ही लोग ऐसे पेय की तलाश करने लगते हैं जो शरीर को तुरंत ठंडक दे सके। ऐसे समय में झारखंड के कई घरों में बनने वाला देसी मट्ठा लोगों की पहली पसंद बन जाता है। ये पारंपरिक पेय न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है। गांव हो या शहर, दोपहर की गर्मी में ठंडा मट्ठा पीने से शरीर को तुरंत राहत मिलती है और थकान भी दूर हो जाती है।
दही से बनता है ये पारंपरिक पेय
मट्ठा दही से तैयार किया जाने वाला एक पारंपरिक और प्राकृतिक पेय है। इसे बनाना बेहद आसान होता है और इसमें इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री लगभग हर रसोई में आसानी से मिल जाती है। यही कारण है कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग बाजार के ठंडे पेय पदार्थों की बजाय घर में बना मट्ठा पीना ज्यादा पसंद करते हैं।
मसालों से बढ़ता है इसका स्वाद
मट्ठा बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में ठंडा पानी लिया जाता है और उसमें ताजा दही डालकर अच्छी तरह फेंट लिया जाता है। इसके बाद स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें काला नमक, सादा नमक और भुना हुआ जीरा पाउडर मिलाया जाता है। जीरा मट्ठा को खास खुशबू और अलग स्वाद देता है। कई लोग इसमें थोड़ा धनिया पाउडर और हल्की तीखापन के लिए लाल मिर्च पाउडर भी डालते हैं।
गर्मी में सेहत के लिए फायदेमंद
जब मट्ठा तैयार हो जाता है तो इसे गिलास में डालकर ठंडा-ठंडा परोसा जाता है। ऊपर से हरा धनिया डालने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। गर्मी के दिनों में मट्ठा पीने से शरीर को ठंडक मिलती है, पाचन बेहतर होता है और शरीर तरोताजा महसूस करता है। यही वजह है कि झारखंड में आज भी ये देसी पेय गर्मी के मौसम में हर घर की रसोई का अहम हिस्सा बना हुआ है।