One District One Cuisine: रामपुर के नवाबी दस्तरखान की शान है 'हापसी हलवा', जानें इसकी शाही दास्तान और रेसिपी
One District One Cuisine: रामपुर का 'हापसी हलवा' 200 साल पुराने नवाबी इतिहास और अपनी अद्भुत पौष्टिकता के लिए प्रसिद्ध है, जिसे अब उत्तर प्रदेश की 'एक जनपद एक व्यंजन' (ODOC) योजना के तहत वैश्विक पहचान दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) योजना के तहत अब रामपुर के मशहूर हापसी हलवे को वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। पीतल नगरी की मुरादाबादी दाल की तरह ही, रामपुर का यह काला हलवा अपनी पौष्टिकता और नवाबी इतिहास के लिए जाना जाता है। योगी सरकार द्वारा घोषित 150 करोड़ रुपये के बजट और 20 लाख रुपये तक के अनुदान से अब रामपुर के इस पारंपरिक जायके को आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ दुनिया भर के बाजारों में उतारा जाएगा।
आइए जानते हैं रामपुर के इस 'ब्लैक डायमंड' यानी हापसी हलवे की दिलचस्प कहानी और इसे घर पर बनाने का तरीका।
हापसी हलवे का शाही इतिहास
हापसी हलवे का इतिहास लगभग 200 साल पुराना है और इसका सीधा संबंध रामपुर की रियासत से है। कहा जाता है कि रामपुर के नवाबों को मीठे का बहुत शौक था, लेकिन वे ऐसा व्यंजन चाहते थे जो स्वाद के साथ-साथ सेहत और मर्दाना ताकत भी बढ़ाए। रामपुर के खानसामों ने दूध, शुद्ध घी और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के मेल से एक ऐसा हलवा तैयार किया जिसे घंटों तक भुना जाता था। अधिक भूनने के कारण इसका रंग गहरा काला या कत्थई हो जाता है, इसी कारण इसे 'हापसी' कहा गया। पुराने समय में रियासत के पहलवान और सिपाही सर्दियों में खुद को गर्म और ऊर्जावान रखने के लिए इसका सेवन करते थे। आज भी रामपुर में कड़ाके की ठंड में हापसी हलवे की मांग सबसे ज्यादा होती है।
क्यों खास है यह हलवा?
हापसी हलवा अन्य हलवों (जैसे गाजर या सूजी) से बिल्कुल अलग है। इसमें अंकुरित गेहूं (समक) का उपयोग होता है, जो इसे एक दानेदार बनावट देता है। इसे बनाने में धैर्य की जरूरत होती है क्योंकि इसे तब तक भुना जाता है जब तक कि दूध और घी पूरी तरह से एक जान न हो जाएं और हलवा अपना सिग्नेचर काला रंग न छोड़ दे।
हापसी हलवा रेसिपी (Rampuri Hapsi Halwa Recipe)
-तैयारी का समय: 2-3 दिन (गेहूं अंकुरित करने के लिए)
-पकाने का समय: 2-3 घंटे
मुख्य सामग्री:
* आधार: 250 ग्राम अंकुरित गेहूं का आटा (गेहूं को भिगोकर, अंकुरित कर और सुखाकर पिसा हुआ)।
* मिठास: 250 ग्राम अंकुरित गेहूं का माप से लगभग 500 ग्राम चीनी या गुड़।
* मेवे और मसाले: 100 ग्राम कटे हुए बादाम-काजू, 20 ग्राम इलायची पाउडर, और चुटकी भर जाफरान (केसर)।
बनाने की विधि
1. दूध और गेहूं का मिश्रण: सबसे पहले एक भारी तले की बड़ी कड़ाही में दूध गरम करें। जब दूध उबलने लगे, तो इसमें अंकुरित गेहूं का आटा धीरे-धीरे डालें और लगातार चलाते रहें ताकि गांठें न पड़ें।
2. धीमी आंच पर पकाना: इस मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक दूध गाढ़ा होकर खोया जैसा न बन जाए। इसमें समय लगता है, लेकिन यही हापसी हलवे की असली तकनीक है।
3. घी की भुनाई: अब इसमें शुद्ध देसी घी डालें। यहीं से असली मेहनत शुरू होती है। हलवे को धीमी आंच पर घंटों तक तब तक भूनें जब तक इसका रंग गहरा भूरा या काला न हो जाए और घी किनारे न छोड़ दे।
4. मिठास और मेवे: जब हलवा महकने लगे और काला हो जाए, तब इसमें चीनी और इलायची पाउडर डालें। चीनी घुलने के बाद इसमें कटे हुए मेवे मिलाएं।
5. फिनिशिंग टच: ऊपर से थोड़ा और घी और केसर डालकर इसे गरमा-गरम सर्व करें।
> प्रो टिप: रामपुर में हापसी हलवे को अक्सर चांदी के वर्क के साथ सजाकर पेश किया जाता है। इसे आप हफ्तों तक स्टोर करके रख सकते हैं, यह खराब नहीं होता बल्कि समय के साथ इसका स्वाद और निखरता है।
रामपुर का यह हापसी हलवा अब सिर्फ गलियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ODOC के जरिए यह आत्मनिर्भर भारत और यूपी की समृद्ध खानपान संस्कृति का नया चेहरा बनेगा।