One District One Cuisine: क्या आपने भी चखी है शाहजहांपुर की 'लौंग बर्फी' का शाही जायका? नवाबों के दौर से है इसका गहरा नाता!

One District One Cuisine: शाहजहांपुर की मशहूर 'लौंग बर्फी' नवाबों के दौर की एक शाही विरासत है, जिसे खोए और लौंग के अनूठे मेल से तैयार किया जाता है। 'वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन' योजना के तहत अब इस पारंपरिक मिठाई को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है, जो अपने औषधीय गुणों और बेहतरीन स्वाद के लिए जानी जाती है।

अपडेटेड May 13, 2026 पर 7:00 AM
Story continues below Advertisement

उत्तर प्रदेश की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन' (ODOC) योजना ने राज्य के छिपे हुए जायकों को दुनिया के सामने लाने का बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में मुरादाबाद की दाल के बाद जो नाम सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है, वह है शाहजहांपुर की मशहूर 'लौंग बर्फी'। पीतल नगरी की दाल की तरह ही इस मिठाई का नाता भी मुगलिया सल्तनत और नवाबों के दौर से है। अगर आप मीठे के शौकीन हैं, तो शाहजहाँपुर की यह सौगात आपकी जुबान पर एक ऐसा स्वाद छोड़ जाएगी जिसे आप कभी भूल नहीं पाएंगे।

नवाब बहादुर खान और लौंग बर्फी की दास्तान

शाहजहांपुर शहर की स्थापना 1647 में नवाब बहादुर खान ने की थी। कहा जाता है कि शाहजहांपुर के नवाबों को खाने-पीने का बहुत शौक था। उन्हें ऐसी मिठाइयां पसंद थीं जो न केवल स्वादिष्ट हों, बल्कि सेहत के लिए भी मुफीद हों। इसी दौरान शाही रसोइयों ने लौंग बर्फी का इजाद किया। उन दिनों लौंग का इस्तेमाल न केवल खुशबू के लिए बल्कि इसके औषधीय गुणों के कारण भी किया जाता था। मावे की मिठास और लौंग की तीखी खुशबू का यह संगम इतना हिट हुआ कि यह देखते ही देखते शाहजहांपुर की पहचान बन गया। आज भी यहाँ की गलियों में इस बर्फी की खुशबू महकती है और दूर-दूर से लोग इसे चखने आते हैं।


क्यों है यह 'लौंग बर्फी' इतनी खास?

बाजार में मिलने वाली आम बर्फी और शाहजहांपुर की लौंग बर्फी में जमीन-आसमान का फर्क है। इसे बनाने की प्रक्रिया काफी धैर्य मांगती है:

1. शुद्ध मावा और धीमी आंच: इसे बनाने के लिए शुद्ध दूध के मावे (खोया) का इस्तेमाल होता है, जिसे घंटों तक धीमी आंच पर तब तक भूना जाता है जब तक वह अपना खास 'दानेदार' टेक्सचर न ले ले।

2. लौंग का जादू: इसका असली सीक्रेट है 'लौंग का अर्क'। इलायची के बजाय यहां लौंग के पाउडर और अर्क का इस्तेमाल होता है, जो इसे एक अलग ही ताजगी और तीखापन देता है।

3. पाचन में मददगार: आमतौर पर मिठाइयां भारी मानी जाती हैं, लेकिन लौंग की मौजूदगी के कारण इसे सुपाच्य (Easy to digest) माना जाता है।

घर पर कैसे बनाएं शाहजहांपुर वाली 'लौंग बर्फी'?

अगर आप शाहजहांपुर नहीं जा पा रहे हैं, तो इस रेसिपी से घर पर ही नवाबी स्वाद का आनंद ले सकते हैं:

सामग्री:

* ताजा खोया (मावा): 500 ग्राम

* चीनी: 200-250 ग्राम (इच्छाशक्ति अनुसार)

* लौंग: 10-15 (पिसी हुई) और 10-12 साबुत

* देसी घी: 2 चम्मच

बनाने की विधि:

* सबसे पहले एक भारी कड़ाही में घी डालकर मावे को सुनहरा होने तक भूनें।

* जब मावा खुशबू छोड़ने लगे, तो इसमें चीनी डालें और धीमी आंच पर चलाते रहें।

* मिश्रण जब गाढ़ा होने लगे, तो इसमें पिसी हुई लौंग मिलाएं। यही वह समय है जब किचन शाहजहांपुर की गलियों जैसा महकने लगेगा।

* अब एक ट्रे में घी लगाकर इस मिश्रण को फैला दें और ऊपर से साबुत लौंग को सजावट के तौर पर लगा दें।

* ठंडा होने पर इसे मनचाहे आकार में काट लें।

ODOC से मिलेगी नई पहचान

योगी सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन योजना के तहत अब शाहजहांपुर की इस मिठाई की ब्रांडिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जाएगी। 150 करोड़ रुपये के बजट के साथ, इस डिश को आकर्षक पैकेजिंग और आधुनिक तकनीक के जरिए एक्सपोर्ट करने की तैयारी है। इससे न केवल स्थानीय हलवाइयों को रोजगार मिलेगा, बल्कि शाहजहांपुर का नाम भी दुनिया के फूड मैप पर चमक उठेगा।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।