फैक्ट्री में बनता है या पेड़ पर उगता है साबूदाना? जानें पूरा सच

Sabudana Kaise Banta Hai: व्रत में साबूदाना से बनी खिचड़ी, खीर और पापड़ लोग बड़े शौक से खाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह तैयार कैसे होता है? क्या यह चावल की तरह उगता है या फैक्ट्री में बनता है? आखिर इसके सफेद और गोल दाने कैसे बनते हैं, आइए जानते हैं

अपडेटेड Mar 26, 2026 पर 10:35 AM
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Sabudana: साबूदाना सीधे खेत में उगने वाली चीज नहीं है। 

व्रत के दौरान साबूदाना एक बेहद लोकप्रिय और भरोसेमंद खाद्य सामग्री के रूप में हर रसोई में अपनी जगह बना लेता है। हल्का, जल्दी पचने वाला और एनर्जी देने वाला होने के कारण लोग इसे अलग-अलग रूपों में खाना पसंद करते हैं, जैसे खिचड़ी, खीर, वड़ा या टिक्की। छोटे-छोटे सफेद मोतियों जैसा दिखने वाला यह साबूदाना देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसके पीछे छिपी प्रक्रिया काफी दिलचस्प होती है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या यह चावल की तरह सीधे खेतों में उगता है या फिर इसे किसी खास तकनीक से तैयार किया जाता है।

कई लोग इसे अनाज समझ लेते हैं, जबकि असलियत इससे अलग है। यही वजह है कि साबूदाना को लेकर जिज्ञासा बनी रहती है और लोग इसके बनने के तरीके को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।

पेड़ से जुड़ा है इसका असली कनेक्शन


साबूदाना सीधे खेत में उगने वाली चीज नहीं है। इसे खास तरह के पेड़ यानी सागो पाम या फिर कसावा (टैपिओका रूट) की जड़ों से तैयार किया जाता है। ये जड़ें देखने में शकरकंद जैसी होती हैं, जिन्हें जमीन से निकालकर फैक्ट्री में प्रोसेस के लिए भेजा जाता है।

जड़ों से बनता है स्टार्च

सबसे पहले इन जड़ों को अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है और उनका छिलका हटाया जाता है। अंदर से ये सफेद होती हैं, जिन्हें पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है। इस पेस्ट को छानकर स्टार्च निकाला जाता है, जो आगे साबूदाना बनने की असली नींव होता है।

धूप में सुखाकर किया जाता है तैयार

निकाले गए स्टार्च को धूप में सुखाया जाता है, जिससे यह सख्त होकर मोटे टुकड़ों में बदल जाता है। यह प्रक्रिया साबूदाना को सही टेक्सचर देने के लिए बेहद जरूरी होती है।

मशीन से बनते हैं सफेद मोती

अंतिम स्टेप में सूखे स्टार्च को मशीन में डालकर बारीक पाउडर बनाया जाता है और फिर छोटे-छोटे गोल दानों का आकार दिया जाता है। यही दाने साबूदाना के रूप में तैयार होकर पैक किए जाते हैं।

फैक्ट्री में पूरा होता है सफर

साबूदाना भले ही पेड़ की जड़ों से मिलता है, लेकिन इसे खाने लायक बनाने की पूरी प्रक्रिया फैक्ट्री में ही पूरी होती है। अलग-अलग साइज के मोती इसी दौरान बनाए जाते हैं। यानी यह सीधे खेत से थाली तक नहीं आता, बल्कि कई स्टेप्स से गुजरकर तैयार होता है।

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