सेहतमंद रहने और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के लिए अक्सर केला खाने की सलाह दी जाती है। यह फल पोटैशियम, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो शरीर को ताकत देने के साथ-साथ पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। यही वजह है कि इसे हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि आजकल बाजार में कई फलों को जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है और केला भी इससे अछूता नहीं है। केमिकल से पकाए गए केले देखने में भले ही आकर्षक लगें, लेकिन वे सेहत के लिए उतने फायदेमंद नहीं होते। ऐसे में जरूरी है कि केला खरीदते समय कुछ आसान संकेतों पर ध्यान दिया जाए, ताकि आप प्राकृतिक रूप से पका हुआ, मीठा और सेहत के लिए सुरक्षित फल चुन सकें।
केला खरीदते समय सबसे पहले उसके रंग पर ध्यान दें। बहुत ज्यादा चमकीले पीले रंग के केले देखने में आकर्षक जरूर लगते हैं, लेकिन कई बार ये कृत्रिम तरीके से पकाए जाते हैं। इसके बजाय हल्के या गहरे पीले रंग के केले चुनना बेहतर होता है।
साथ ही केले के डंठल को भी ध्यान से देखें। अगर डंठल का रंग हल्का भूरा, काला या पीला है, तो यह संकेत है कि केला प्राकृतिक तरीके से पका है। लेकिन अगर डंठल पूरी तरह हरा दिखाई दे, तो संभावना है कि उसे केमिकल की मदद से जल्दी पकाया गया हो।
छूकर और सूंघकर भी समझ सकते हैं फर्क
केला खरीदने से पहले उसे हल्के से दबाकर देखना भी एक अच्छा तरीका है। सही पका हुआ केला हल्का नरम होता है। अगर केला बहुत सख्त है तो वह अभी कच्चा हो सकता है, जबकि जरूरत से ज्यादा नरम केला जल्दी खराब होने वाला होता है।
इसके अलावा खुशबू से भी फर्क समझा जा सकता है। प्राकृतिक रूप से पके केले से हल्की मीठी और ताजी सुगंध आती है, जबकि केमिकल से पकाए गए केले से अक्सर अजीब या कृत्रिम गंध महसूस हो सकती है।
छिलके के धब्बे भी देते हैं संकेत
केले के छिलके पर बने छोटे-छोटे भूरे या काले धब्बे कई लोगों को खराब लगते हैं, लेकिन असल में यही संकेत देते हैं कि केला पूरी तरह पका और मीठा है। इन धब्बों को “शुगर स्पॉट्स” कहा जाता है, जो फल के प्राकृतिक रूप से पकने की निशानी माने जाते हैं।
इसलिए अगली बार जब भी बाजार से केला खरीदने जाएं, तो केवल उसके आकार या चमक पर नहीं बल्कि रंग, खुशबू और छिलके पर बने निशानों पर भी ध्यान दें। इससे आप आसानी से केमिकल से पकाए गए केले की जगह प्राकृतिक और सेहतमंद केले चुन पाएंगे।