30 की उम्र पार करते ही महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। पहले जैसी फुर्ती नहीं रहती, थकावट जल्दी महसूस होती है और सबसे आम परेशानी होती है बढ़ता वजन। खासकर पेट, कूल्हों और जांघों में चर्बी जमा होने लगती है, जिससे न केवल शरीर का शेप बिगड़ता है बल्कि पहनावे को लेकर आत्मविश्वास भी कम हो जाता है। कई बार महिलाएं खुद को आइने में देखकर असहज महसूस करती हैं। लेकिन ये केवल सुंदरता तक सीमित बात नहीं है। बढ़ता वजन धीरे-धीरे सेहत पर भी असर डालता है और कई बीमारियों की जड़ बन सकता है। डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट की दिक्कतें इसी के बाद शुरू होती हैं।
ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं वक्त रहते अपना ध्यान रखें। सही वजन जानकर उसे मेंटेन करना आसान हो सकता है और इसका तरीका भी बेहद आसान है। बस आपको जाननी है अपनी हाइट, बाकी काम खुद हो जाएगा।
सिर्फ सुंदरता नहीं, सेहत भी बिगाड़ता है ज्यादा वजन
महिलाएं अक्सर बढ़े हुए वजन को केवल लुक्स से जोड़कर देखती हैं। लेकिन यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है। ज्यादा वजन से डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए समय रहते सतर्क होना बेहद जरूरी है।
वजन कंट्रोल के लिए क्या करें?
महिलाओं को 30 की उम्र के बाद अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। प्रोसेस्ड फूड कम करें। हेल्दी और संतुलित डाइट लें। रोज थोड़ा चलें, योग करें या हल्की एक्सरसाइज को रूटीन बनाएं। सबसे जरूरी है अपनी हाइट के हिसाब से सही वजन को समझना और उसी के अनुसार लाइफस्टाइल सेट करना।
वजन मापने का आसान फॉर्मूला
अगर किसी महिला की हाइट 5 फीट है, तो उसका सही वजन 50 किलो होना चाहिए।
अब इसे ऐसे समझें — यदि किसी महिला की हाइट सेंटीमीटर में 150 सेमी है, तो उस आंकड़े से 100 घटा दें। यानी, 150 – 100 = 50 किलो। यही उस महिला का आदर्श वजन माना जाएगा।
जिन महिलाओं के परिवार में बीमारियां हों
अगर किसी महिला के परिवार में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या हार्ट डिजीज का इतिहास है, तो उन्हें अपने वजन को आदर्श वजन से 5 से 6 किलो कम रखना चाहिए।
इससे गंभीर बीमारियों की संभावना कम होती है और जीवन ज्यादा स्वस्थ रहता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।