हर माता-पिता की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि उनका बच्चा न सिर्फ पढ़ाई में अच्छा हो, बल्कि अच्छे संस्कारों और सही सोच के साथ आगे बढ़े। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनका सामाजिक दायरा भी बढ़ने लगता है। वे नए दोस्तों से मिलते हैं, अलग-अलग माहौल में जाते हैं और कई तरह के अनुभवों से गुजरते हैं। इसी दौरान कई बार वे अनजाने में ऐसी संगत में भी पड़ सकते हैं, जो उनके व्यवहार और भविष्य दोनों पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था सबसे संवेदनशील समय होता है, जब बच्चे बहुत जल्दी दूसरों से प्रभावित हो जाते हैं और सही-गलत का फर्क समझने में गलती कर सकते हैं।
ऐसे में माता-पिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही बच्चे को गलत दिशा में ले जा सकती है। इसलिए इस उम्र में समझदारी और सतर्कता बेहद जरूरी हो जाती है।
अचानक बदलता व्यवहार और बढ़ती चिड़चिड़ाहट
अगर आपका खुशमिजाज बच्चा अचानक गुस्सैल, बहस करने वाला या चिड़चिड़ा हो जाए, तो इसे हल्के में न लें। गलत संगत में आने पर बच्चे परिवार से दूरी बनाने लगते हैं और अकेले रहना पसंद करने लगते हैं।
बातें छिपाना और झूठ बोलने की आदत
अगर बच्चा छोटी-छोटी बातों को छिपाने लगे, अपने दिन का हिसाब देने से कतराए या फोन और दोस्तों को लेकर ज्यादा सीक्रेटिव हो जाए, तो ये भी खतरे का संकेत हो सकता है। बार-बार झूठ बोलना भी इसी बदलाव का हिस्सा है।
पुराने दोस्तों से दूरी और नए साथी
जब बच्चा अपने पुराने अच्छे दोस्तों से दूर होकर नए ऐसे लोगों के साथ घूमने लगे जिनके बारे में वह कुछ न बताए, तो सतर्क हो जाना चाहिए। अगर वो अपने नए दोस्तों से आपको मिलवाने से बचता है, तो ये चिंता का विषय है।
अगर पढ़ाई में अच्छा बच्चा अचानक कमजोर होने लगे, स्कूल से शिकायतें आने लगें या वो क्लास बंक करने लगे, तो ये साफ संकेत है कि उसका ध्यान किसी और दिशा में भटक रहा है।
पैसों की बढ़ती मांग या घर से चीजें गायब होना
अगर बच्चा अचानक ज्यादा पैसे मांगने लगे या घर से पैसे/कीमती चीजें गायब होने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह गलत आदतों की शुरुआत का संकेत हो सकता है।
दिनचर्या बदलना और देर से घर लौटना
रोज देर से घर आना, नियमों की अनदेखी करना और सवाल पूछने पर टालमटोल जवाब देना भी गलत संगत की ओर इशारा करता है। साथ ही, कपड़ों से अजीब गंध या व्यवहार में अजीब बदलाव भी संकेत हो सकते हैं।
सख्ती नहीं, समझदारी से अपनाएं
ऐसे हालात में गुस्सा या सख्ती बच्चे को और दूर कर सकती है। बेहतर है कि आप दोस्त बनकर उससे बात करें, उसकी बातें समझें और जरूरत पड़े तो काउंसलर की मदद लें। सही प्यार और मार्गदर्शन ही बच्चे को सही रास्ते पर वापस ला सकता है।