जीजा के जूते और सालियों की शरारत! जानिए क्या है जूता चुपाई की परंपरा

wedding rituals: शादी के दौरान निभाई जाने वाली मजेदार रस्मों में से एक है जूता चुराई, जिसमें दुल्हन की बहनें या सहेलियां दूल्हे के जूते चुराकर उन्हें छिपा देती हैं। फिर जूते लौटाने के बदले में नेग या गिफ्ट की मांग की जाती है। यह रस्म मस्ती के साथ-साथ रिश्तों में अपनापन बढ़ाने का जरिया भी है

अपडेटेड Jun 12, 2025 पर 10:51 AM
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wedding rituals: कुछ कथाओं में ये कहा गया है कि यह रस्म रामायण काल से चली आ रही है।

शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी मिलन होता है। भारतीय संस्कृति में इसे एक पवित्र और जन्मों-जन्मों का बंधन माना गया है। इस खास दिन को यादगार बनाने के लिए लोग महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर देते हैं। हर धर्म, समुदाय और क्षेत्र में शादियों के अपने-अपने रीति-रिवाज होते हैं, जो परंपरा और रिश्तों की गर्मजोशी को दर्शाते हैं। हिंदू विवाह में कुछ रस्में बेहद गंभीर और धार्मिक होती हैं, तो कुछ रस्में शादी में खुशियां और मस्ती घोल देती हैं। इन्हीं मजेदार परंपराओं में से एक है ‘जूता चुराई’ की रस्म, जिसमें दुल्हन की बहनें और सहेलियां मिलकर दूल्हे के जूते चुराकर नेग मांगती हैं।

हंसी-मजाक और शरारतों से भरी इस रस्म का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि रिश्तों को और भी मजबूत बनाना होता है। ये परंपरा हर शादी को एक खास याद में बदल देती है।

क्या होती है जूता चुराई की रस्म?


शायद आपने देखा हो कि शादी के मंडप में जब दूल्हा पूजा-पाठ में व्यस्त होता है, तो दुल्हन की बहनें और सहेलियां मौका देखकर उसके जूते चुरा लेती हैं। बाद में वे जूते लौटाने के बदले दूल्हे से नेग या तोहफा मांगती हैं। ये रस्म भले ही हंसी-मजाक से जुड़ी दिखे, लेकिन इसके पीछे एक खास सोच छुपी होती है।

क्यों निभाई जाती है यह परंपरा?

जूता चुराई का मकसद सिर्फ मजाक करना नहीं होता। इस रस्म के जरिए दूल्हे की समझदारी, धैर्य और स्वभाव का परीक्षण किया जाता है। सालियां ये जानना चाहती हैं कि उनका जीजा कैसे बिना गुस्साए, मजाक में सबको संभालता है और अपने जूते वापस पाने की कोशिश करता है। इस तरह से वे ये भी देखती हैं कि दूल्हा कितना विनम्र और सुलझा हुआ है।

रिश्तों में बढ़ाता है मिठास

ये रस्म दूल्हा-दुल्हन के रिश्ते के साथ-साथ उनके परिवारों के बीच भी अपनापन बढ़ाने का काम करती है। जूते वापस पाने के लिए दूल्हा जब लड़की वालों से मजाक में बातचीत करता है, तो दोनों परिवारों के बीच संवाद और तालमेल बेहतर होता है। यही छोटी-छोटी बातें शादी के माहौल को खुशनुमा बनाती हैं।

क्या रामायण काल से चल रही है ये परंपरा?

कुछ कथाओं में ये कहा गया है कि यह रस्म रामायण काल से चली आ रही है। कहा जाता है कि सीता और राम के विवाह के समय सीता की सखियों ने श्रीराम के जूते चुरा लिए थे। हालांकि, इस बात का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन ये कहानी इस रस्म को और भी दिलचस्प बना देती है।

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