क्या आपने कभी ऐसा सपना देखा है जो बार-बार आपको डराता है, और जागने के बाद भी दिल की धड़कन बढ़ी रहती है? इसे केवल डरावना सपना न समझें। वैज्ञानिकों के अनुसार, नाइटमेयर्स यानी बार-बार आने वाले डरावने सपने सिर्फ मानसिक तनाव का संकेत नहीं हैं, बल्कि आपके शरीर की उम्र बढ़ने और मौत के जोखिम से भी जुड़े हो सकते हैं। शोध में इसे टेलोमियर लंबाई और एपिजेनेटिक क्लॉक्स के जरिए मापा गया, जो आपकी कोशिकाओं और डीएनए के आधार पर बायोलॉजिकल उम्र बताते हैं। रिसर्च में तीन क्लॉक्स – डुनेडिनPACE, ग्रिमएज और फेनोएज – इस्तेमाल किए गए। नतीजा चौंकाने वाला था- लगातार नाइटमेयर्स देखना मौत के जोखिम का 39-40% हिस्सा समझा सकता है।
सोचिए, अगर आपकी रोजमर्रा की नींद ही परेशान है, तो ये न केवल थकान या मूड बिगाड़ता है, बल्कि आपके स्वास्थ्य और लंबी उम्र पर भी असर डाल सकता है। इसलिए बार-बार डरावने सपने आने पर इसे हल्के में न लें।
अध्ययन में पाया गया कि बच्चों में लगातार नाइटमेयर्स भी तेज एजिंग के संकेत दिखाते हैं। यानी ये सिर्फ वयस्कों की समस्या नहीं, बल्कि हर उम्र में शरीर पर गहरा असर डाल सकता है।
दिलचस्प बात ये है कि नाइटमेयर्स का असर स्मोकिंग, मोटापा, खराब डाइट और कम एक्टिविटी जैसी सामान्य जीवनशैली की गलतियों से भी ज्यादा मजबूत है। ये अध्ययन पहला है जो साबित करता है कि बुरे सपने सीधे तेज एजिंग और मौत से जुड़े हैं, भले ही अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हों।
नाइटमेयर्स कैसे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं
बार-बार डरावने सपने देखने से शरीर में फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स सक्रिय होता है। इसका मतलब है कि हार्ट रेट बढ़ता है और तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल रिलीज होते हैं। लगातार ऐसा होने से शरीर पर लगातार दबाव बनता है, जिससे उम्र तेजी से बढ़ती है।
नाइटमेयर्स नींद तोड़ते हैं और रेम स्लीप प्रभावित होती है। रेम स्लीप वो चरण है जब सपने आते हैं और शरीर व मस्तिष्क खुद को रिपेयर करते हैं। खराब नींद से कोशिकाओं की मरम्मत रुक जाती है, जिससे शरीर जल्दी बूढ़ा होने लगता है।
बार-बार नाइटमेयर्स देखने से टेलोमियर छोटे हो जाते हैं और एपिजेनेटिक बदलाव होते हैं। इसका मतलब है कि आपकी कोशिकाएं जल्दी क्षतिग्रस्त होती हैं और शरीर की उम्र आपकी कैलेंडर उम्र से ज्यादा हो जाती है।
मौत का खतरा और गंभीर बीमारियां
तेज एजिंग के कारण दिल की बीमारियां, कैंसर और अन्य रोग जल्दी हो सकते हैं। अध्ययन में ये कॉक्स रिग्रेशन से भी साबित हुआ।
एक और रिसर्च में ये पाया गया कि नाइटमेयर्स सुसाइड रिस्क से भी जुड़े होते हैं। मानसिक रोगियों में बुरे सपने अक्सर सुसाइडल क्राइसिस से 4 महीने पहले शुरू होते हैं।
डॉक्टर नींद की समस्याएं, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य की जांच कर सकते हैं।
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी फॉर इंसोम्निया (CBT-I) या इमेज रिहर्सल थेरेपी (IRT) में डरावने सपनों को अच्छे में बदलने का अभ्यास कराया जाता है।
अगर नाइटमेयर्स का समय रहते इलाज किया जाए, तो शायद एजिंग धीमी हो सकती है और जीवनकाल बढ़ सकता है। इसलिए बार-बार बुरे सपने आने पर इसे सिर्फ सपना न समझें, बल्कि स्वास्थ्य का संकेत मानकर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।