अगर आप चाहते हैं कि आपका गार्डन हर मौसम में हरा-भरा और फूलों से सजा रहे, तो बारिश के इस सीजन में गुड़हल (Hibiscus) की कटिंग लगाना सबसे बढ़िया उपाय है। गुड़हल की डालियां मॉनसून में बेहद जल्दी जड़ पकड़ती हैं और थोड़ी देखभाल से साल भर खूबसूरत फूल भी देती हैं।
गुड़हल को उत्तर भारत में सबसे लोकप्रिय फूलों में गिना जाता है। इसे कई जगह शो फ्लावर, जसुद या चाइना रोज भी कहा जाता है, लेकिन आमतौर पर लोग इसे गुड़हल ही बोलते हैं।
गुड़हल का पौधा गार्डन में शोभा बढ़ाने के साथ-साथ घर की सकारात्मकता भी बढ़ाता है। इसकी खासियत है कि यह सिर्फ 2-3 दिन में कटिंग से भी जड़ पकड़ सकता है और खूब फूल देता है।
गुड़हल लगाने के लिए सबसे अच्छा मौसम बारिश या मॉनसून है। इस दौरान मिट्टी में नमी रहती है जिससे पौधा जल्दी तैयार हो जाता है।
कटिंग से गुड़हल उगाने के लिए करीब 6 इंच लंबी डाली लें। ध्यान रखें, डाल के नीचे के हिस्से की 4-5 पत्तियां हटा दें ताकि वह हिस्से आसानी से जड़ पकड़ सके।
अब इस कटिंग को किसी कंटेनर में पानी में आधा हिस्सा डूबोकर हल्की रोशनी में रखें। लगभग 3-4 हफ्तों में इसमें सफेद जड़ें दिखने लगेंगी।
जड़ें आने के बाद इस कलम को सीधे गमले या ग्रो बैग में लगा दें। अगर चाहें तो शुरुआत में ही कटिंग को गीली मिट्टी में भी सीधे लगा सकते हैं
गमले में मिट्टी भरें और कलम के आधे हिस्से को मिट्टी में गाड़कर हल्का पानी छिड़कें। ध्यान रखें, ज्यादा पानी ना डालें, वरना जड़ों को नुकसान हो सकता है।
कुछ ही दिनों में कटिंग से नई पत्तियां निकलने लगेंगी और आपका गुड़हल का पौधा पूरी तरह विकसित होने लगेगा। पौधों के आसपास हमेशा हल्की नमी रखें और धूप से भी थोड़ा बचाएं।
गुड़हल को बीज से भी उगाया जा सकता है। इसके लिए बीजों को ग्रो बैग या गमले में मिट्टी डालकर बिखेर दें और नियमित रूप से पानी स्प्रे करें। जल्द ही अंकुरण शुरू हो जाएगा।
Story continues below Advertisement
गुड़हल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार पौधा तैयार हो जाए, तो पूरे साल इसमें फूल खिलेंगे। गुड़हल के लाल, सफेद, गुलाबी जैसे कई रंग मिलते हैं, जिससे आपका गार्डन हमेशा रंग-बिरंगा बना रहेगा।