आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आम लोग भी अपनी सेहत को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। बढ़ती डायबिटीज, मोटापा और थकान की शिकायतों के बीच लोग अपने रोज के खाने पर सवाल करने लगे हैं। ऐसे माहौल में आकृति की कहानी कई लोगों को खुद से जोड़कर देखने पर मजबूर करती है। करीब दस साल पहले उन्होंने रोटी और चावल को अपनी थाली से हटा दिया, लेकिन ये फैसला किसी फैशन या सोशल मीडिया ट्रेंड से प्रेरित नहीं था। उनका मानना था कि लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए खानपान में बदलाव जरूरी है। आज जहां अधिकतर परिवार रोटी-चावल को भोजन का आधार मानते हैं, वहीं आकृति दाल से बने चीले, सब्जियां और संतुलित आहार को प्राथमिकता देती हैं।
नियमित व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या के साथ वो खुद को ऊर्जावान महसूस करती हैं। उनकी जीवनशैली ये सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आम लोग भी छोटे-छोटे बदलाव कर अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं।
रोटी छोड़ने का बढ़ता ट्रेंड
सोशल मीडिया पर अब कई भारतीय रोज की थाली में रोटी की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं। वजह है—ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और कम प्रोटीन। कुछ सेलेब्रिटीज भी रोटी-चावल छोड़ने की बात खुलकर कर चुके हैं, जिससे ये सोच और तेजी से फैल रही है।
अब गेहूं की रोटी की जगह बेसन, मूंग दाल, ओट्स, ज्वार, बाजरा और रागी जैसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं। फिर भी रोटी भारतीय खाने का अहम हिस्सा है, जिसे पूरी तरह छोड़ पाना हर किसी के लिए आसान नहीं।
समाधान बना ‘प्रोटीन रोटी’
यहीं से प्रोटीन रोटी का चलन शुरू हुआ। कंपनियां गेहूं के आटे में सोया, चना, मटर जैसे प्रोटीन मिलाकर हाई-प्रोटीन आटा ला रही हैं, ताकि रोटी खाते हुए ही प्रोटीन की मात्रा बढ़ सके।
भारत में बड़ी आबादी पर्याप्त प्रोटीन नहीं ले पाती। हमारी थाली में कार्ब्स ज्यादा और प्रोटीन कम होता है। ऐसे में रोज खाई जाने वाली रोटी को ज्यादा पोषक बनाना एक व्यावहारिक तरीका माना जा रहा है।
क्या प्रोटीन रोटी सही समाधान है?
प्रोटीन रोटी मददगार हो सकती है, लेकिन यह संतुलित आहार का विकल्प नहीं है। दाल, सब्जी, फल और अन्य प्रोटीन स्रोत भी जरूरी हैं। सही जानकारी और संतुलन के साथ ही इसे अपनाना बेहतर माना जाता है।