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कमरे की खुशबू के पीछे होता है केमिकल खेल! जानिए कैसे बनता है रूम फ्रेशनर

ज्यादातर रूम फ्रेशनर को सूंघने से हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक इस्तेमाल कुछ लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। तेज खुशबू और उसमें मौजूद कुछ केमिकल सेंसेटिव लोगों में सिरदर्द, एलर्जी या सांस की परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसलिए कमरे में रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल सही तरीके से करना चाहिए।

Roopali Sharmaअपडेटेड Aug 27, 2026 पर 10:27 AM
कमरे की खुशबू के पीछे होता है केमिकल खेल! जानिए कैसे बनता है रूम फ्रेशनर

रूम फ्रेशनर आजकल लगभग हर घर में इस्तेमाल होने लगा हैं। कमरे में अच्छी खुशबू लाने और बदबू दूर करने के लिए लोग कई तरह के रूम फ्रेशनर इस्तेमाल करते हैं। इनकी खुशबू से कमरा फ्रेश और अच्छा महसूस होता है, लेकिन इन्हें रोज और लंबे समय तक इस्तेमाल करना हार्मफुल हो सकता है। रूम फ्रेशनर की सेफ्टी उसमें इस्तेमाल किए गए केमिकल और उसकी मात्रा पर डिपेंड करती हैं। रूम फ्रेशनर कम मात्रा सांस के जरिए अंदर लेने से नुकसान कम होता है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा या लगातार इस्तेमाल करना सेफ नहीं होता है। कुछ लोगों को तेज खुशबू या उसमें मौजूद कुछ केमिकल से सिरदर्द, एलर्जी, स्किन में जलन या सांस से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

रूम फ्रेशनर अलग-अलग खुशबू में आते हैं, इनमें फ्रेगरेंस केमिकल और एसेंशियल ऑयल शामिल होते हैं। कई लिक्विड फ्रेशनर में खुशबू वाले तेल को आइसोप्रोपाइल अल्कोहल जैसे सॉल्वेंट के साथ मिलाया जाता है, ताकि खुशबू आसानी से हवा में फैल सके। कुछ प्लग-इन फ्रेशनर गर्म होकर खुशबू फैलाते हैं। कुछ प्रोडक्ट्स में केमिकल भी हो सकते हैं। इसलिए कमरे को खुशबूदार बनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1. ब्रीथिंग का ध्यान

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