भारत में चाय और मिठाई का रिश्ता बेहद खास है। सुबह की शुरुआत हो, दोस्तों की महफिल जमे या किसी खास मौके पर मीठा खाने का मन हो, चाय का कप हमेशा साथ नजर आता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जब मिठाई या कोई मीठी चीज खाने के तुरंत बाद चाय पी जाती है, तो उसका स्वाद कुछ अलग ही लगता है — जैसे फीका पड़ गया हो। हैरानी की बात ये है कि चाय और कॉफी में खुद भी चीनी डाली जाती है, फिर भी ये उतनी मीठी क्यों नहीं लगती जितनी लगनी चाहिए?
ये एक ऐसा सवाल है जो अक्सर चाय प्रेमियों को सोचने पर मजबूर कर देता है। यही वजह है कि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे क्या राज छिपा है। आइए इस दिलचस्प सवाल का जवाब ढूंढते हैं और जानते हैं इसके पीछे की वजह।
हमारी जीभ पर हजारों स्वाद कलिकाएं (taste buds) मौजूद होती हैं। ये अलग-अलग स्वादों को पहचानने का काम करती हैं – जैसे मीठा, खट्टा, नमकीन या कड़वा। जब हम मीठी चीजें खाते हैं, तो हमारी जीभ पर मौजूद मीठा पहचानने वाले रिसेप्टर्स पूरी तरह सक्रिय हो जाते हैं और चीनी से भर जाते हैं।
मीठा खाने के बाद स्वाद क्यों फीका लगता है
मीठा खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने पर उनका स्वाद उतना तेज क्यों नहीं लगता? इसका कारण है कि हमारे स्वीट रिसेप्टर्स पहले ही चीनी से भर चुके होते हैं। इस स्थिति में जब हम वही या कोई अन्य मीठी चीज खाते हैं, तो हमारी जीभ उसे उतनी तीव्रता से महसूस नहीं कर पाती। यही वजह है कि चाय या कॉफी फीकी लगती है।
टेस्ट एडेप्टेशन का वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिक भाषा में इसे टेस्ट एडेप्टेशन (taste adaptation) कहा जाता है। इसका मतलब है कि जब कोई स्वाद लगातार जीभ को मिलता है, तो उसकी संवेदनशीलता कुछ समय के लिए कम हो जाती है। मीठा खाने के बाद स्वीट रिसेप्टर्स का असर थोड़ी देर के लिए कमजोर हो जाता है।
स्वाद को फिर से महसूस करने का तरीका
अगर आप चाहते हैं कि चाय या कॉफी का स्वाद सही लगे, तो मीठी चीज खाने के बाद कुछ समय का इंतजार करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार करीब 15 से 20 मिनट का अंतर रखने पर स्वीट रिसेप्टर्स का असर सामान्य हो जाता है और चाय या कॉफी का स्वाद पूरी तरह से महसूस किया जा सकता है।
मिठाई खाने के तुरंत बाद चाय न पीएं।
अगर जल्द चाय पीनी हो, तो उसमें चीनी कम डालें।
पानी पीने से भी जीभ की संवेदनशीलता थोड़ी जल्दी वापस आती है।