फलों का राजा तो हर कोई जानता है, लेकिन रानी का नाम सुनकर रह जाएंगे हैरान!

Fruit Queen Mystery: बचपन से हम सभी ने फलों के राजा यानी आम का नाम तो सुना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फलों की भी एक रानी होती है? बहुत कम लोग इस बारे में जानते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि किस फल को ‘फलों की रानी’ कहा जाता है और क्यों

अपडेटेड Jun 09, 2025 पर 3:29 PM
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Fruit Queen Mystery: मैंगोस्टीन न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और फाइबर का भी अच्छा स्रोत है।

जब भी फलों की बात होती है, सबसे पहले आम का नाम जहन में आता है—आख़िरकार इसे ‘फलों का राजा’ जो कहा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर राजा है, तो रानी भी तो होगी? जी हां, फलों की दुनिया में एक ऐसी रानी भी है, जिसका नाम है मैंगोस्टीन। ये फल जितना सुंदर दिखता है, उतना ही लाजवाब इसका स्वाद भी होता है—मीठा, हल्का खट्टा और बेहद रसीला। दिलचस्प बात ये है कि ज्यादातर लोग इसके नाम से भी अनजान हैं, क्योंकि ये फल भारत में नहीं बल्कि मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों में पाया जाता है।

खास जलवायु और लंबे इंतजार के बाद मिलने वाला ये फल स्वाद और सेहत दोनों का खजाना है। चलिए, आज आपको मिलवाते हैं फलों की इस रानी से, जो स्वाद में राजसी और सेहत में रत्न है।

कहां पाया जाता है फलों की रानी मैंगोस्टीन?


मैंगोस्टीन एक दुर्लभ और बेहद खास फल है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों जैसे थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया में उगता है। इसका स्वाद मीठे और हल्के खट्टेपन का संतुलित मेल होता है। ये फल रसीला, मुलायम और हल्का रेशेदार होता है – जो इसे बाकी फलों से बिल्कुल अलग बनाता है।

उगाने में लगता है सालों का समय

मैंगोस्टीन का वैज्ञानिक नाम है Garcinia mangostana और इसे उगाना कोई आसान काम नहीं। इस पेड़ को फल देने में करीब 7 से 9 साल का समय लग जाता है। वहीं अच्छी फसल के लिए 10 से 20 साल तक का इंतजार भी करना पड़ सकता है। ये सिर्फ खास तापमान (4°C से 38°C के बीच) में ही पनपता है।

कब और कैसे मिला ‘फलों की रानी’ का खिताब?

इस अनोखे फल को ‘फलों की रानी’ का खिताब अमेरिकी वनस्पति वैज्ञानिक डेविड फेयरचाइल्ड ने दिया था। उन्होंने अपनी किताब Exploring for Plants (1930) में इसका जिक्र करते हुए इसे ये उपाधि दी थी। दिलचस्प बात ये भी है कि ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को भी ये फल बेहद पसंद था।

भारत में क्या कहा जाता है मैंगोस्टीन को?

भारत में इस फल को अलग-अलग भाषाओं में अलग नामों से जाना जाता है — हिंदी में मंगूस्तान, मराठी में कोकम, मलयालम में कट्टंपि, कन्नड़ में हन्नू और बंगाली में बाओ।

स्वाद के साथ सेहत भी  मैंगोस्टीन के फायदे

मैंगोस्टीन न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और फाइबर का भी अच्छा स्रोत है। ये इम्युनिटी को मजबूत करता है, एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करता है, और सर्दी-खांसी से लेकर कैंसर व दिल की बीमारियों तक के खतरे को कम कर सकता है।

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