Assembly Elections 2023: चुनावी रणनीति में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोई सानी नहीं और शायद यही कारण है कि ये पार्टी हमेशा चुनाव के मोड में तैयार रहती है। अब भी पार्टी ने साल के आखिर में होने वाले मध्य प्रदेश (MP), राजस्थान (Rajasthan) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) के लिए अपनी कमर कस ली है और मैदान पर जुट गई है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में BJP की क्या कुछ रणनीति है, आज इस पर ही बात करेंगे। इस बार पार्टी ने राजस्थान और मध्य प्रदेश की हर एक सीट का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की ठानी है और ये रिपोर्ट पार्टी के स्थानीय नेता या विधायक नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से आने वाले बीजेपी विधायक तैयार करेंगे और ये विधायक न सिर्फ सीट बल्कि उम्मीदवारों का विश्लेषण भी करेंगे।
सबसे पहले बात करते हैं मध्य प्रदेश की, जहां पार्टी ने इस रणनीति को लागू कर दिया है। राज्य की 230 विधानसभा सीटों के लिए पार्टी ने चार राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार के अपने 230 विधायकों को 19 अगस्त को मध्य प्रदेश भेजा था। राजधानी भोपाल पहुंचने पर इन विधायकों के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम भी रखा गया, जिसको नाम दिया गया- प्रवासी विधायक प्रशिक्षण शिविर।
इसके तहत हर एक विधायक के हिस्से में एक विधानसभा सीट आई है। एक दिन के ट्रेनिंग प्रोग्राम के बाद ये सभी विधायक 20 अगस्त से 27 अगस्त तक उन सीटों का दौरा करेंगे, जिनकी उन्हें जिम्मेदारी दी गई है।
गुजरात के सूरत से BJP विधायक संगीता पाटिल को इंदौर विधानसभा -2 की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब हमारे गुजरात में चुनाव हुए थे, तो MP के विधायक वहां आये थे और बीजेपी पार्टी के कार्यकर्ताओं की तरह काम किया था। उसी तरह हम भी पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में आए हैं। हम विधायक नहीं, बल्कि कार्यकर्ता बनकर काम करेंगे। संगठन का काम होगा, हम देखेंगे कि क्या कार्यक्रम किए जा सकते हैं, कैसे किए जा सकते हैं और इसका क्या फायदा हो सकता है।
राजस्थान की नब्ज टटोलेंगे बाहरी विधायक
ठीक इसी तरह पार्टी राजस्थान में भी बाहर से विधायक भेज कर राज्य की नब्ज टटोलने की कोशिश कर रही है। प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दूसरे राज्यों के बीजेपी विधायकों को दी गई है। एक विधायक को एक सीट की जिम्मेदारी मिली है। इस सीट पर ये विधायक 7 दिन का कैंप करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे मध्य प्रदेश में कर रहे हैं। सात दिन पूरे होने के बाद विधायक अपनी फीडबैक रिपोर्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेंगे।
राजस्थान में BJP गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली से अपने विधायकों को भेजेगी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, दावा ये भी किया जा रहा है कि इन विधायकों के काम करने का तरीका एकदम गोपनीय यानि सीक्रेट होगा। कौन-सा विधायक किस विधानसभा सीट पर जाएगा, इसकी जानकारी भी किसी-किसी को ही होगी।
इन विधायकों का क्या होगा काम?
ये सब करने के बाद ये विधायक अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे और पार्टी आलाकमान को भेज देंगे। इसी आधार पर पार्टी राज्य में अपना चुनावी रोडमैप तैयार करेगी।
अहम बात ये कि इन विधायकों का सबस ज्यादा फोकस उन सीटों पर होगा, जहां BJP की हार हुई थी। साथ ही उन सीटों पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जहां उपचुनाव में पार्टी की हार का सामना करना पड़ा।
तो कुल मिला कर अगर BJP इन राज्यों में जीत जाती है, तो पार्टी के इस 'प्रवासी विधायक प्रशिक्षण शिविर' को उसकी जीत का एक बड़ा आधार कहना गलत नहीं होगा।