Assembly Elections 2023: चुनाव आयोग (Election Commission) ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के दौरान उनकी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए अलग-अलग नोटिस जारी किया है। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंदिर दर्शन यात्रा से संबंधित लिफाफा वाली टिप्पणी को लेकर प्रियंका गांधी और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पिछले सप्ताह राज्य के इकलौते मुस्लिम मंत्री मोहम्मद अकबर को निशाना बनाकर की गई टिप्पणियों के लिए असम के मुख्यमंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
प्रियंका के खिलाफ BJP ने की शिकायत
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रियंका के खिलाफ शिकायत दी थी, जिसके एक दिन बाद आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा है। भगवा पार्टी ने बुधवार को प्रियंका पर राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान झूठे दावे करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की निजी धार्मिक आस्था का उल्लेख करने का आरोप लगाया था। निर्वाचन आयोग से उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया था। बीजेपी ने अपनी शिकायत में कहा है कि वाड्रा ने 20 अक्टूबर को दौसा में एक जनसभा में कहा था कि उन्होंने टीवी पर देखा कि जब प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एक मंदिर में दिए गए दान का एक लिफाफा खोला गया तो उसमें केवल 21 रुपये थे।
इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि बीजेपी जनता को 'लिफाफे' दिखाती है लेकिन चुनाव के बाद उनमें कुछ नहीं मिलता। बीजेपी ने अपनी शिकायत में उनकी टिप्पणी का एक वीडियो भी शामिल किया है। सरमा और गांधी को नोटिस का जवाब देने के लिए 30 अक्टूबर शाम 5 बजे तक का समय दिया गया है।
असम के सीएम पर क्या है आरोप?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 18 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के कवर्धा में अपने भाषण के दौरान अकबर पर निशाना साधते हुए कहा था, "यदि अकबर को नहीं हटाया गया तो माता कौशल्या की भूमि अपवित्र हो जाएगी।" उन्होंने आगे कहा था, "एक अकबर कहीं आता है तो 100 अकबर बुलाता है। अत: जितनी जल्दी हो सके उसे विदा करो, अन्यथा माता कौशल्या की भूमि अपवित्र हो जाएगी।" नोटिस मिलने पर CM हिमंत बिस्वा ने शुक्रवार को X पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस ने माननीय चुनाव आयोग से यह जानकारी छिपाई है कि मोहम्मद अकबर कवर्धा निर्वाचन क्षेत्र से उनके उम्मीदवार हैं। इसलिए किसी उम्मीदवार की वैध आलोचना सांप्रदायिक राजनीति नहीं है।