MP Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार, जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधने की कोशिश

MP Cabinet Expansion: पूर्व मंत्री, ब्राह्मण नेता और विंध्य क्षेत्र के रीवा से चार बार के विधायक राजेंद्र शुक्ला, महाकौशल क्षेत्र के बालाघाट से सात बार के विधायक और मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन और बुंदेलखंड क्षेत्र के टीकमगढ़ जिले के खरगापुर से विधायक राहुल लोधी ने मंत्री पद की शपथ ली। लोधी पहली बार विधायक बने हैं

अपडेटेड Aug 26, 2023 पर 3:04 PM
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MP Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार

मध्य प्रदेश (MP) के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने साल के आखिर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से कुछ महीने पहले शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन विधायकों को मंत्री के रूप में शामिल करके अपने मंत्रिमंडल का विस्तार (Cabinet Expansion) किया। राज्य में विधानसभा चुनाव होने में तीने महीने से भी कम का समय रह गया है। ऐसे मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ BJP ने मध्य प्रदेश में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधने की कोशिश की है। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने सुबह करीब नौ बजे राज भवन में तीन विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई।

पूर्व मंत्री, ब्राह्मण नेता और विंध्य क्षेत्र के रीवा से चार बार के विधायक राजेंद्र शुक्ला, महाकौशल क्षेत्र के बालाघाट से सात बार के विधायक और मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन और बुंदेलखंड क्षेत्र के टीकमगढ़ जिले के खरगापुर से विधायक राहुल लोधी ने मंत्री पद की शपथ ली। लोधी पहली बार विधायक बने हैं।

शपथ ग्रहण समारोह के बाद एक दूसरे कार्यक्रम से इतर मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव से लगभग 75 दिन पहले मंत्रिमंडल विस्तार के सवाल पर पत्रकारों से कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद भी प्रदेश में BJP की सरकार बनने वाली है।


इसके साथ ही शिवराज के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में अब कुल 34 सदस्य हो गए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक ये संख्या 35 तक जा सकती है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, राज भवन के एक अधिकारी ने बताया कि 59 साल के शुक्ला और 71 साल के बिसेन ने कैबिनेट मंत्री के रूप में, जबकि 46 साल के लोधी ने राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। हालांकि, तीनों को अभी विभाग का आवंटन नहीं किया गया है।

लोधी BJP की वरिष्ठ नेता उमा भारती के भतीजे हैं। वहीं, बिसेन और लोधी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिसकी मध्य प्रदेश की आबादी में 45 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी है।

शुक्ला के शामिल होने से मंत्रिमंडल में विंध्य क्षेत्र के मंत्रियों की संख्या चार हो जाएगी, जबकि बिसेन के आने से महाकौशल इलाके के मंत्रियों की संख्या दो और लोधी के जुड़ने से बुंदेलखंड के मंत्रियों की संख्या पांच हो जाएगी।

BJP सूत्रों ने कहा कि सत्ता विरोधी लहर से निपटने, जातिगत समीकरणों को संतुलित करने और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की सिफारिश पर कैबिनेट विस्तार किया गया है। इससे पहले, शिवराज कैबिनेट का आखिरी विस्तार जनवरी 2021 में हुआ था।

मंत्रिमंडल विस्तार से BJP को क्या होगा फायदा?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि शुक्ला को मंत्रिमंडल में शामिल करने से BJP को विंध्य क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी, जहां पार्टी विधायक और एक मजबूत ब्राह्मण नेता नारायण त्रिपाठी के समर्थन वाला नया राजनीतिक दल विंध्य जनता पार्टी (VJP) पहली बार चुनाव लड़ेगा। VJP विंध्य क्षेत्र की सभी 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है।

साल 2018 के विधानसभा चुनावों में, बीजेपी ने विंध्य क्षेत्र में 24 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस केवल छह सीटें हासिल कर सकी थी। इस बार BJP को विंध्य क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर से निपटना है। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी (AAP) वहां पैठ जमाने की कोशिश कर रही है।

इसी तरह, बिसेन के शामिल होने से उन लोगों की नाराजगी दूर होने की संभावना है, जो महसूस करते हैं कि BJP ने उनकी उपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि बिसेन से पहले महाकौशल क्षेत्र से केवल एक ही मंत्री था। पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन खराब रहा था।

पिछले चुनाव में महाकौशल क्षेत्र की 38 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 24 पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 13 सीटें हासिल हुई थीं। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार की झोली में गई थी।

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लोधी के शामिल होने से उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे बुंदेलखंड क्षेत्र में भी BJP को फायदा हो सकता है। पार्टी ने पिछले चुनाव में 29 सीटों वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया था। उसे 15 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस को नौ सीटों से संतोष करना पड़ा। एक-एक सीट समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के खाते में गई थी।

OBC में लोधी समुदाय की बड़ी हिस्सेदारी है और वह ग्रामीण मध्य प्रदेश में अच्छा-खासा प्रभाव रखता है।

बीजेपी ने 2003 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस से सत्ता छीन ली थी। तब से दिसंबर 2018 से मार्च 2020 के बीच 15 महीने की अवधि को छोड़कर, जब कांग्रेस कमलनाथ के नेतृत्व में सत्ता में थी। बीजेपी राज्य में सत्ता पर काबिज है। 2018 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने 230 सीटों में से 114 सीटें जीती थीं, जबकि BJP 109 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही थी।

कांग्रेस ने निर्दलीय, BSP और सपा विधायकों के समर्थन से कमलनाथ के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाई थी। हालांकि, ये सरकार 15 महीने बाद गिर गई थी, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति वफादार कई कांग्रेस विधायक BJP में शामिल हो गए थे। इससे शिवराज के मुख्यमंत्री के रूप में वापसी करने का रास्ता भी खुला था।

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