MP Election 2023: 20 साल से कांग्रेस को बुधनी सीट पर जीत का इंतजार, 2006 से नहीं खोज पाई 'मामा' शिवराज के करिश्मे की काट

MP Election 2023: 'मामा' अपनी पारंपरिक सीट बुधनी (Budhni) से ही ताल ठोकेंगे। सिहोर जिले में आने वाली बुधनी विधानसभा राज्य के सबसे प्रमुख और चर्चित सीटों में से एक है। ये सीट चर्चाओं में इसलिए भी है, क्योंकि पिछले 20 सालों से यहां बीजेपी का कब्जा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी से लगातार पांच पर विधायक हैं। ये इलाका उनका गृह क्षेत्र भी है

अपडेटेड Oct 11, 2023 पर 6:55 PM
MP Election 2023: 2006 से बुधनी सीट पर कांग्रेस नहीं खोज पाई 'मामा' शिवराज के करिश्मे की काट

MP Election 2023: मध्य प्रदेश की विधानसभा चुनाव (MP Assembly Election) की तारीख का ऐलान होने के साथ ही ये भी साफ हो गया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) चुनाव लड़ रहे हैं। 'मामा' अपनी पारंपरिक सीट बुधनी (Budhni) से ही ताल ठोकेंगे। सिहोर जिले में आने वाली बुधनी विधानसभा राज्य के सबसे प्रमुख और चर्चित सीटों में से एक है। ये सीट चर्चाओं में इसलिए भी है, क्योंकि पिछले 20 सालों से यहां बीजेपी का कब्जा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी से लगातार पांच पर विधायक हैं। ये इलाका उनका गृह क्षेत्र भी है। शिवराज सिंह चौहान 1990, 2006, 2008, 2013 और 2018 में बुधनी विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। 2006 में हुए उपचुनाव में भी ये सीट बीजेपी के खाते में गई थी। कांग्रेस पिछले 20 सालों से इस सीट को जीतने का इंतजार कर रही है।

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साल 2018 में इस सीट से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 58,999 वोटों से जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार अरुण यादव को हराया था।

बुधनी में कुल 60 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस चुनाव में शिवराज चौहान के खाते में 123,492 यानि 60% प्रतिशत वोट गया था। अरुण यादव को सिर्फ 64,493 वोट ही मिले थे।

कब-कब जीती कांग्रेस?

कांग्रेस को 1998 के चुनाव में यहां आखिरी बार जाती हासिल हुई थी। तब कांग्रेस के देवकुमार पटेल ने इस सीट पर अपना परचम लहराया था। इससे पहले 1993 में कांग्रेस से राजकुमार पटेल ने यहां से जीत दर्ज की थी।

गठन के बाद 1957 में हुए चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से राजकुमारी सूरज कला बुधनी से विधायक चुनी गईं थी। इसके बाद 1980 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) से केएल प्रधान यहां से विधायक बने थे।

कब-कब रहा बीजेपी का कब्जा?

इस सीट पर बीजेपी की जीत का खाता 1967 में खुला, जब भारतीय जनसंघ से मोहनलाल शिशिर बुधनी से चुनाव जीते। इसके बाद साल 1977 में जनता पार्टी से शालिग्राम वकिल ने जीत हासिल की। 1985 के चुनाव भारतीय जनता पार्टी के चौहान सिंह चौहान यहां से विधायक बने।

1990 के चुनाव में बुधनी में शिवराज सिंह चौहान की एंट्री हुई और उन्होंने इस सीट को बीजेपी के टिकट पर जीता। हालांकि, साल 2003 से तो बुधनी सीट पर एक तरह से बीजेपी का ही कब्जा है। तब यहां से बीजेपी उम्मीदवार राजेन्द्र सिंह विधायक चुने गए।

इसके बाद 2006 के उपचुनाव से लेकर साल 2018 के विधानसभा चुनाव तक लगातार शिवराज सिंह चौहान ही इस सीट पर जीतते आ रहे हैं।

क्या है जातीय समीकरण?

जातिगत आंकड़ों पर एक नजर डाली जाए, तो बुधनी में आदिवासी, किरार, ब्राह्मण, राजपूत, पवार, मुस्लिम, मीणा और यादव वोट ही तय करता है कि कौन विधायक की कुर्सी पर बैठेगा।

साल 2018 के आंकड़ों के अनुसार, बुधनी सीट से कुल 15 उम्मीदवार मैदान में थे। यहां कुल 2,45,049 मतदाता हैं। इसमें 1,27, 991 पुरुष और 1,16,871 महिला वोटर्स हैं।

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