MP Election 2023: '...तो विधायक क्या सरपंच का चुनाव लड़ें?' BJP की दूसरी लिस्ट के बाद उठने लगे बगावत के सुर

MP Election 2023: मैहर, सतना, सीधी और नागदा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बदले गए, तो यहां से पार्टी के घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ बगावत भी होने लगी। किसी नेता ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी दी, तो किसी ने मुरली मनोहर जोशी और लाल कृष्ण आडवाणी का नाम लेकर वरिष्ठ नेताओं को टिकट दिए जाने के पार्टी के फैसले पर तंज कसा

अपडेटेड Sep 27, 2023 पर 4:29 PM
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MP Election 2023: BJP की दूसरी लिस्ट के बाद उठने लगे बगावत के सुर

MP Election 2023: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मध्य प्रदेश के लिए दूसरी लिस्ट (Second list) और उसमें उम्मीदवारों के नाम अब तक चर्चाओं में हैं। आखिर चर्चा हो भी क्यों ना, जब पार्टी अपने तीन-तीन केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़वा रही है। अब इसका एक उल्टा असर भी देखने को मिल रहा है। क्योंकि जिन सीटों से पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों का टिकट कटा है या जहां से उम्मीदवार बदला गया है, वहां से अब बगावत के सुर उठते दिखाई दे रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैहर, सतना, सीधी और नागदा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बदले गए, तो यहां से पार्टी के घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ बगावत भी होने लगी। किसी नेता ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी दी, तो किसी ने मुरली मनोहर जोशी और लाल कृष्ण आडवाणी का नाम लेकर वरिष्ठ नेताओं को टिकट दिए जाने के पार्टी के फैसले पर तंज कसा।

'सीधी में सांसद की होगी बड़ी हार'


सबसे पहले बात करते हैं सीधी विधानसभा क्षेत्र की है, यहां से मौजूदा विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट काटकर सांसद रीति पाठक को टिकट दिया गया है। पार्टी के इस फैसले से केदारनाथ शुक्ला खासे नाराज दिख रहे हैं। उनका कहना है, "सीधी से सांसद को टिकट देना ठीक नहीं है। वह (रीति पाठक) मध्य प्रदेश में हारने वालों में नंबर एक पर रहेंगी, लेकिन बीजेपी ने टिकट दिया है, तो क्या कर सकते हैं।"

शुक्ला का अगला कदम क्या होगा ये तो अभी साफ नहीं है, लेकिन उन्होंने ये फैसला अपने समर्थकों पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, "आज हजारों की संख्या में कार्यकर्ता मेरे घर आए थे। मैंने सबको एक हफ्ते का समय दिया है। कार्यकर्ताओं की जो राय होगी, वही मेरा फैसला होगा।"

ऐसा माना जा रहा है कि सीधी पेशाब कांड में विधायक केदारनाथ शुक्ला का नाम आने के कारण ये फैसाल लिया गया है। क्योंकि ऐसे आरोप लगते आए कि घटना के आरोपी के संबंध विधायक शुक्ला से थे। इससे पार्टी हाईकमान खासा नाराज था। शुक्ला की गिनता विंध्या क्षेत्र के बड़े नेताओं में होती है।

वहीं दूसरी तरफ टिकट की दावेदारी कर रहे बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष और प्रदेश कार्य समिति के सदस्य डॉ. राजेश मिश्रा ने भी नाराजगी जताते हुए बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है।

'मुरली मनोहर जोशी और लालकृष्ण आडवाणी का क्या गुनाह?'

सीधी की तरह ही मैहर विधानसभा सीट से भी बीजेपी ने चार बार के विधायक नारायण त्रिपाठी का टिकट लिया है। उनकी जगह श्रीकांत चतुर्वेदी को उम्मीदवार बनाया गया है।

यूं तो नारायण त्रिपाठी ने इस फैसले से अपने ऊपर कोई असर नहीं पड़ने की बात कही है, लेकिन लगे हाथ उन्होंने पार्टी पर तंज कसने का मौका भी नहीं छोड़ा। वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतारने के फैसले पर उन्होंने कहा, "इतने सीनियर नेताओं और मंत्रियों को विधायक का चुनाव लड़ाया जा रहा है, तो मुरली मनोहर जोशी और लालकृष्ण आडवाणी का क्या गुनाह था। उन्हें भी मौका देना चाहिए था।"

त्रिपाठी ने आगे कहा कि जब सांसद, विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे तो क्या विधायक, सरपंच का चुनाव लड़ेंगे? युवा राष्ट्र की कल्पना करने वाली बीजेपी ने अपने बुजुर्ग नेताओं को विधानसभा चुनाव उम्मीदवार बनाया है।

उन्होंने आगे कहा, "मैं विन्ध्य प्रदेश के पुनर्निर्माण की लड़ाई लड़ रहा हूं और टिकट से मेरे फैसले में फर्क नहीं आएगा।" नारायण त्रिपाठी ने अपनी अलग 'विंध्य पार्टी' बनाई है। वो अपनी पार्टी के टिकट से मैहर सीट से चुनाव लड़ेंगे। पिछले चुनाव में श्रीकांत चतुर्वेदी कांग्रेस से प्रत्याशी थे और 184 वोट से नारायण से हारे थे।

'कोरोना काल में यही सांसद गणेश सिंह घर से नहीं निकले'

सतना सीट से लोकसभा सांसद गणेश सिंह को टिकट दिए जाने से नाराज स्थानीय बीजेपी नेता रत्नाकर चतुर्वेदी "शिवा" ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा, "कोरोना काल में यही सांसद गणेश सिंह घर से नहीं निकले। सतना की जनता ने अगर सहमति दी, तो वे गणेश जी के आशीर्वाद से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।"

रत्नाकर BJYM और सतना सहकारी बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके अलावा सतना से पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी के भी बिगावत करने की आशंका है।

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इसके अलावा नागदा विधानसभा सीट से डॉ. तेज बहादुर सिंह को टिकट दिया गया है। इसके बाद स्थानीय नेता लोकेंद्र मेहता ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनका दावा है कि पार्टी के सर्वे और पैनल में उनका नाम एक नंबर पर था। फिर भी उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "ये समझ से परे है कि किस आधार पर मेरा टिकट काटा गया है।"

BJP ने 39 सीटों के लिए उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट में तीन केंद्रीय मंत्रियों और चार सांसदों को उम्मीदवार घोषित किया है। तोमर और फग्गन सिंह कुलस्ते उन सीटों से चुनाव लड़ेंगे, जहां 2018 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। बाकी चार लोकसभा सांसदों में से तीन उन निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ेंगे, जहां मुख्य विपक्षी पार्टी पिछले विधानसभा चुनावों में विजयी हुई थी।

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