बीजेपी ने मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में लोकसभा के 7 सांसदों को चुनाव मैदान में उतारा है, जिनमें 3 केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। राज्य में 17 नवंबर को मतदान है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है कि क्या ये दिग्गज पांचवीं बार भगवा पार्टी को सत्ता में लाने में कामयाब होंगे? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी का यह कदम माहौल बनाने के लिए तो ठीक है, लेकिन इस बात को लेकर आशंका है कि इससे उसे कुछ ठोस हासिल होगा।
पार्टी इसके जरिये उन राजनीतिक नेताओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहती है, जिनकी अपने-अपने क्षेत्र में बड़ी अपील है। बीजेपी ने पिछले महीने एक आश्चर्यजनक फैसले के तहत 3 केंद्रीय समेत कुल 7 सासंदों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने का फैसला किया। केंद्रीय मंत्रियों- नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है और इन सभी को संभावित सीएम उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है।
इसके अलावा, बीजेपी ने पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) को इंदौर-1 विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। उनके खिलाफ कांग्रेस के विधायक संजय शुक्ला चुनाव लड़ रहे हैं। विजयवर्गीय को भी मुख्यमंत्री का संभावित चेहरा माना जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राशिद किदवई का कहना है कि विधानसभा चुनाव में लोकसभा सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों का उतारने का फैसला पहली नजर में आकर्षक जान पड़ता है, लेकिन यह पार्टी के भीतर चिंता और डर को भी दिखाता है। उन्होंने बताया कि यह बात मोटे तौर पर सभी लोग जानते हैं कि पार्टी की जिला इकाइयां नरेंद्र तोमर, विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल और अन्य की उम्मीदवारी के पक्ष में नहीं थीं। उन्हें उतारने का फैसला बीजेपी संसदीय बोर्ड का था, ताकि राज्य के विभिन्न हिस्सों में पार्टी के कैंपेन को बढ़ावा मिल सके।
किदवई ने कहा, 'सवाल यह है कि क्या कोई वोटर अपनी पसंद इसलिए बदलेगा, क्योंकि मौजूदा विधायक या स्थानीय दावेदार को हटाकर लोकसभा सांसद को चुनाव मैदान में उतारा गया है? यह रणनीति दिखने में आकर्षक लगती है, लेकिन इससे कुछ ठोस हासिल होने की संभावना नहीं है।'
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Tomar) मुरैना लोकसभा सीट से सांसद हैं और वह दिमनी (Dimani) सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, जहां से कांग्रेस के मौजूदा विधायक रवींद्र सिंह तोमर भी उम्मीदवार हैं। बीजेपी इस सीट पर पिछली तीन बार से लगातार चुनाव हार रही है।
जिवाजी यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर भुवनेश सिंह तोमर का कहना है कि पिछले चुनाव में ग्वालियर-चंबल इलाके में बीजेपी के खिलाफ माहौल था। उन्होंने कहा, 'इस बार भी हालात कमोबेश ऐसे ही हैं और बीजेपी को भी इस सिलसिले में राय मिली होगी। लिहाजा, पार्टी ने खास रणनीति के तहत कुछ उम्मीदवारों को बदल दिया है, जबकि नरेंद्र सिंह तोमर जैसे दिग्गज नेता को भी मैदान में उतारा है।'
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल (Prahlad Patel) और फग्गन कुलस्ते (Faggan Kulaste) महाकौशल क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे हैं। पटेल दमोह लोकसभा सीट से सांसद हैं और वह नरसिंहपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो होशंगाबाद संसदीय सीट के अंदर पड़ता है। यहां कांग्रेस की तरफ से विधायक लखन सिंह पटेल उम्मीदवार हैं।
इसके अलावा, फग्गन कुलस्ते मंडला (सुरक्षित) से सांसद हैं और वह निवास विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं, जो उनके संसदीय क्षेत्र में ही है। केंद्रीय मंत्री ने 1990 में इस टी पर कांग्रेस उम्मीदवार को हराया था, लेकिन अगले विधानसभा चुनाव यानी 1993 में वह हार गए थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में उनके भाई राम प्यारे कुलस्ते यहां से चुनाव हार गए थे।