Maharashtra Election: बागियों का साथ देने वालों पर CM शिंदे का एक्शन, सात नेताओं को दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता

Maharashtra Chunav 2024: बीजेपी ने बेलापुर विधानसभा क्षेत्र से मंदा म्हात्रे को उम्मीदवार बनाया है और इसी के चलते पार्टी के जिला अध्यक्ष संदीप नाइक ने बगावत कर शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है। जिस वक्त महायुति में शामिल बीजेपी के भीतर ये बगावत चल रही थी, तो वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के उपनेता विजय नाहटा ने भी बगावत कर दी

अपडेटेड Nov 13, 2024 पर 6:46 PM
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Maharashtra Election: बागियों का साथ देने वालों पर CM शिंदे का एक्शन

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आखिरकार बेलापुर विधानसभा क्षेत्र से बागी उम्मीदवार विजय नाहटा का समर्थन करने वाले पार्टी के सात प्रमुख पदाधिकारियों को निष्कासित करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री का साफ स्टैंड था कि वह नाहटा के विद्रोह का समर्थन नहीं करेंगे। ठाणे के सांसद नरेश म्हस्के ने भी वाशी की बैठक में इसी तरह का रुख रखा, फिर कई पार्टी नेताओं नाहटा का समर्थन किया, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया गया।

बीजेपी ने बेलापुर विधानसभा क्षेत्र से मंदा म्हात्रे को उम्मीदवार बनाया है और इसी के चलते पार्टी के जिला अध्यक्ष संदीप नाइक ने बगावत कर शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है।

जिस वक्त महायुति में शामिल बीजेपी के भीतर ये बगावत चल रही थी, तो वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के उपनेता विजय नाहटा ने भी बगावत कर दी और निर्दलीय चुनाव का पर्चा दाखिल कर दिया।


क्यों बढ़ गई बीजेपी की बेचैनी?

संदीप नाइक की पार्टी में एंट्री से कुछ दिन पहले नाहटा ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में घोषणा की थी कि वह शरद पवार की पार्टी में शामिल हो रहे हैं, लेकिन संदीप नाइक की बगावत की भनक लगते ही शरद पवार ने नाहटा की एंट्री रोक दी। बाद में संदीप नाइक की एंट्री के कारण नाहटा के लिए तुरही की कमान संभालना संभव नहीं हो सका।

बगावत के इस माहौल में शिव सेना (शिंदे) पार्टी के कुछ पूर्व नगरसेवक और पदाधिकारी सार्वजनिक तौर पर नहाटा के साथ दिखे। इससे बीजेपी में बेचैनी बढ़ गई थी। मुख्यमंत्री ने भी सीधी चेतावनी दी थी कि यह विद्रोह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नरेश म्हस्के ने कुछ दिन पहले बैठक कर चेतावनी दी थी कि नाहटा का समर्थन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी कुछ नेता नहाटा के साथ नजर आए। आखिरकार मुख्यमंत्री ने इनमें से सात पदाधिकारियों को पार्टी से निष्कासित करने का निर्णय लिया।

माने तो बच गये, लेकिन घोडेकर पत्ता कटा

विजय नाहटा के विद्रोह को पार्टी के शहर प्रमुख विजय माने और नेरुल क्षेत्र के पूर्व नगरसेवक दिलीप घोडेकर ने समर्थन दिया। माने और घोडेकर दोनों वाशी में महायुति की बैठक में शामिल हुए।

इस बैठक में माने ने महायुति को समर्थन देने का ऐलान करते हुए यह भी कहा कि पार्टी के साथ गलत हुआ है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को निष्कासन आदेश पारित करते हुए माने के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, दिलीप घोडेकर को पार्टी से निकाल दिया गया है। इसके अलावा नहाटा के कट्टर समर्थक सानपाड़ा प्रभाग प्रमुख मिलिंद सूर्यराव, नेरुल उप-जिला प्रमुख संजय भोसले, तुर्भे प्रभाग प्रमुख आतिश घरत, वाशी संपर्क प्रमुख कृष्णा सावंत, सानपाड़ा उप-विभाग प्रमुख देवेंद्र चोरगे और सानपाड़ा प्रभाग प्रमुख संजय वास्कर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

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