Rajasthan Assembly Elections 2023: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पिछले दिनों दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए सचिन पायलट (Sachin Pilot) को लेकर बड़ा बयान दिया था। गहलोत ने गुटबाजी और सुलह पर पूछे गए सवालों पर कहा था कि नेताओं को धैर्य रखना चाहिए। क्यों कि धैर्य रखने पर कभी न कभी मौका मिलता है। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के प्रति निष्ठावान और धैर्यवान पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद इनाम मिलेगा? वैसे जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मियां बढ़ रही हैं समय के साथ सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की तिकड़ी ने पायलट को उनके धैर्य और कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्धता के लिए बहुत अधिक महत्व देना शुरू कर दिया है।
पिछले साल सितंबर में पायलट के वफादार विधायकों द्वारा कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ मोर्चा खोले जाने के बाद गांधी परिवार के साथ उनके संबंधों में खटास आ गई थी। पायलट के राजनीतिक व्यक्तित्व में परिवर्तन आश्चर्यजनक है। उनका वर्तमान आचरण उस विद्रोही व्यक्तित्व से बहुत अलग है जो उन्होंने 2020 के विद्रोह के बाद से तीन वर्षों में हासिल किया है। उस विद्रोह से गहलोत को अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिली लेकिन पायलट को हाशिए पर धकेल दिया गया।
पाटलट को डिप्टी सीएम और राज्य कांग्रेस प्रमुख के रूप में अपने दोनों पद गंवाने पड़े। राजस्थान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद का फैसला विधायकों से राय ले कर चुनाव के बाद पार्टी आलाकमान करेगा जो सबको स्वीकार होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी नहीं है। डोटासरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा कर्नाटक एवं हिमाचल प्रदेश के बाद राजस्थान में भी नाकाम होगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले डोटासरा ने गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच के मतभेदों से जुड़े सवाल पर कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख नेताओं के बीच कोई कभी मनभेद नहीं रहा है तथा सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे बीच कभी मनभेद नहीं रहे। सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं और इस चुनाव में हम जीतेंगे। पूर्व मंत्री डोटासरा सीकर जिले की लक्ष्मणगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
पायलट को हाईकमान से मिला है आश्वासन?
सचिन पायलट जिस तरह से राजस्थान में चुनावी प्रचार कर रहे हैं ऐसा लग रहा है कि उन्हें हाईकमान से कोई आश्वासन मिला हुआ है। पायलट जानते हैं कि अगर गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस हार जाती है, तो वह राजस्थान में पार्टी के भविष्य के लिए प्रमुख ताकत बनकर उभर सकते हैं। लेकिन अगर कांग्रेस अपने मुख्य चेहरे के रूप में गहलोत के साथ जीतती है, तो सीएम प्रश्न पर पायलट-गहलोत तनाव फिर से बढ़ सकता है।
फिलहाल, पायलट शांत रहकर झूठ बोलने और अनावश्यक विवादों से दूर रहने की रणनीति अपना रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने कांग्रेस अधिवेशन में सोनिया गांधी की उस सलाह को गहराई से आत्मसात कर लिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि "जो धैर्य रखता है उसे एक दिन मौका मिलता है।" टोंक सीट के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद पायलट स्पष्ट रूप से राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से अपने जीवन के कठिन दौर में अपना समय बिता रहे हैं।
बढ़ती उम्र और गांधी परिवार के साथ होने तथा धैर्य को एक मजबूत हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे पायलट को उम्मीद है कि उन्हें अपनी वफादारी के बदले में कुछ बड़ा इनाम मिलेगा। वह एक शांतिपूर्ण और धैर्यवान राजनेता के तौर पर खुद को पेश कर रहे हैं। क्या राजस्थान में जारी चुनावी युद्ध में सचिन की कम-प्रोफाइल रणनीति उनके लिए शीर्ष पुरस्कार सुनिश्चित करेगी? यह एक दिलचस्प सवाल बना हुआ है जिसका जवाब केवल समय ही देगा।
पीएम मोदी लगातार बोल रहे हैं हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान को लेकर कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए एक चुनावी जनसभा में कहा कि दोनों बेमन से हाथ मिला रहे हैं जबकि उनके दिलों में खटास है। पीएम मोदी ने नागौर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली दरबार अपने ही मुख्यमंत्री की कुर्सी को लूटने में बहुत व्यस्त और सीएम उनसे निपटने में व्यस्त है। इन लोगों ने राजस्थान की जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया था। अब चुनाव का समय आया है तो ये लोग बेमन से साथ साथ फोटो खिंचवा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में बार-बार हाथ मिलन का कार्यक्रम होता है। दिल्ली से बड़े-बड़े नेता आकर मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री बनने का इंतजार कर रहे दूसरे नेता का कैमरे के सामने हाथ मिलवाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा किपांच साल में इनके हाथ मिलन की सेंचुरी हो गई, लेकिन मिलाप नहीं हुआ। दिल में खटास है लेकिन ये लोग हाथ मिलाने का दिखावा कर रहे हैं। राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों के लिए 25 नवंबर को मतदान होना है। जबकि मतगणना 3 दिसंबर को होगी।