Rajasthan Election 2023 Home voting facility: राजस्थान विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। राजस्थान में पहली बार विधानसभा चुनाव में मतदाता घर बैठे वोट डाल सकेंगे। हालांकि, आयोग की तरफ से मतदान अनिवार्य करने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया है। लेकिन राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को घर बैठे वोटिंग की सुविधा मिलेगी। चुनाव आयोग के मुताबिक, करीब 18.05 लाख मतदाताओं को घर बैठकर वोट डालने की सुविधा दी जाएगी। 80 साल से ऊपर के बुजुर्गों और 40 फीसदी से अधिक दिव्यांग कैटेगरी के मतदाताओं को यह सुविधा दी जाएगी। चुनाव आयोग के इस फैसले से वोट डालने के लिए बड़े बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को बूथ पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ऐसा पहली बार है जब विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को विकल्प के तौर पर होम वोटिंग की सुविधा दी जाएगी। न्यूज 18 के मुताबिक, निर्वाचन आयोग के निर्देश अनुसार, 80 साल से अधिक आयु के सीनियर सिटीजन और 40% से अधिक दिव्यांग कैटेगरी के विशेष योग्यजन मतदाताओं के लिए प्रदेश में पहली बार विधानसभा चुनाव में घर से वोटिंग की पहल की गई है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि समावेशी चुनाव की दिशा में आयोग ने यह नया प्रयोग है। इसके तहत बूथ लेवल के अधिकारी घर-घर पर जाकर वोटिंग की सुविधा के लिए योग्य मतदाताओं को इसके संबंध में जानकारी उपलब्ध कराएंगे।
छत्तीसगढ़ में भी घर से मिलेगी वोटिंग की सुविधा
राजस्थान के अलावा छत्तीसगढ़ में भी बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से वोटिंग की सुविधा मिलेगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि 80 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक और 40 फीसदी से ज्यादा दिव्यांग मतदाता विधानसभा चुनाव में घर से ही डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान कर सकेंगे। इसके लिए पात्र मतदाताओं को चुनाव की अधिसूचना के पांच दिनों के भीतर फॉर्म 12-D भरना होगा। अधिकारी ने बताया कि इन मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने-ले जाने की सुविधा भी मिलेगी। सभी मतदान केंद्रों पर शौचालय, व्हीलचेयर और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने 23 नवंबर को बड़े पैमाने पर शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों के मद्देनजर राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख को बदल दिया है। राज्य में अब 25 नवंबर को मतदान होगा। आयोग ने एक बयान में कहा कि मतदान की तारीख 23 नवंबर में बदलाव के लिए विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों ने आग्रह किया था।
बयान में कहा गया कि 23 नवंबर को बड़े पैमाने पर शादी/सामाजिक कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए मतदान की तारीख में बदलाव का निर्णय लिया गया है, क्योंकि उस दिन मतदान होने से बड़ी संख्या लोगों को असुविधा हो सकती है। इस दौरान साजो-सामान को लाने-ले जाने में दिक्कत हो सकती है तथा मतदान के दौरान मतदाताओं की भागीदारी भी कम रह सकती है।
दरअसल, 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इसे एक शुभ दिन माना जाता है और उस दिन राज्य में 50 हजार से ज्यादा शादियां हो सकती हैं। देवउठनी एकादशी से शादियों का मुहुर्त शुरू हो जाता है। मतगणना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 3 दिसंबर को ही होगी। उसी दिन चार अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए भी मतगणना होगी।