Rajasthan Election 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव में कितनी रही महिलाओं की हिस्सेदारी, महिला आरक्षण बिल के बीच जरूर देखें ये आंकड़े
Rajasthan Election 2023: इस विधेयक में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीट आरक्षित रखने का प्रस्ताव है। मतलब विधायकी में महिलाओं की भागीदारी अब और भी बढ़ जाएगी। राजनीतिक गलियारों में ये गूंज है कि सरकार ये बिल लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए लेकर आई है, लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि इस बिल को पास होने के बाद भी लागू होने में करीब-करीब सात से आठ साल लग जाएंगे।
Rajasthan Election 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव में कितनी रही महिलाओं की हिस्सेदारी
Rajasthan Election 2023: देश की नई संसद (New Parliament) में कामकाज के पहले ही दिन, एक एतिहासिक विधेयक पेश किया गया। मोदी सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाते हुए, सदन में महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा विधेयक (Women Reservation Bill) पेश किया। इस विधेयक में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीट आरक्षित रखने का प्रस्ताव है। मतलब विधायकी में महिलाओं की भागीदारी अब और भी बढ़ जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में ये गूंज है कि सरकार ये बिल लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए लेकर आई है, लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि इस बिल को पास होने के बाद भी लागू होने में करीब-करीब सात से आठ साल लग जाएंगे। सत्ता पक्ष और विपक्ष बिल से जुड़े कई मुद्दों को लेकर आमने-सामने हैं।
अगले कुछ महीनों में राजस्थान, मध्य प्रदेश (MP), छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh), तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में एक नजर डालते हैं, राजस्थान (Rajasthan) की विधानसभा और वहां के पिछले चुनावों पर, और देखते हैं कि राज्य में महिलाओं की अब से पहले कितनी भागीदारी रही।
महिला प्रत्याशी और जीतने वालों के आंकड़े
शुरुआत करते हैं साल 1972 के विधानसभा चुनाव से, तब कुल 17 महिला प्रत्याशी मैदान में थीं, जिनमें से 13 उम्मीदवारों ने चुनाव जीता था। तब प्रति हजार पुरुषों पर महिला वोटर का रेश्यो था 723।
इसके बाद 1977 में 31 महिला उम्मीदवार मैदान में उतरीं और केवल ने ही जीत हासिल की। इस साल प्रति हजार पुरुषों पर केवल 763 महिला वोटर थीं।
1980 के विधानसभा चुनाव में भी कुल 31 महिला प्रत्याशी थीं, जिसमें से केवल 10 ही चुनाव जीत पाईं। तब प्रति हजार पुरुषों पर केवल 744 महिला वोटर थीं।
1985 के चुनाव में कुल 45 महिलाएं मैदान में उतरीं और सिर्फ 17 ही चुनाव जीत पाईं। उस साल प्रति हजार पुरुषों पर केवल 728 महिला वोटर थीं।
1990 के विधानसभा चुनाव में कुल 93 महिलाओं को टिकट मिला, जिसमें केवल 11 ही जीत हासिल कर पाई। तब प्रति हजार पुरुषों पर केवल 736 महिला वोटर थीं।
इसके तीन साल बाद 1993 में फिर चुनाव हुए, जिसमें कुल 97 उम्मीदवार महिलाएं थीं और केवल 10 को जीत मिली। तब प्रति हजार पुरुषों पर केवल 755 महिला वोटर थीं।
फिर 1998 के विधानसभा चुनाव में 69 महिलाएं उम्मीदवार थीं और तब सिर्फ 14 महिलाएं ही विधायक बनीं। तब प्रति हजार पुरुषों पर केवल 786 महिला वोटर थीं।
2003 के चुनाव में महिला प्रत्याशियों की संख्य 100 के पार पहुंची और कुल 118 महिलाओं ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन जीत सिर्फ 12 महिलाओं को ही मिल पाई। इस चुनाव में प्रति हजार पुरुषों पर 841 महिला वोटर थीं।
साल 2008 में कुल 154 महिलाएं चुनावी मैदान में उतरीं और जीत का तोहफा सिर्फ 28 को ही मिला। इस चुनाव में प्रति हजार पुरुषों पर 874 महिला वोटर थीं।
2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 166 महिला उम्मीदवार थीं। इस बार भी सिर्फ 28 महिला ही चुनाव जीतीं। तब प्रति हजार पुरुषों पर 899 महिला वोटर थीं।
अब बात करते हैं, पिछले और 2018 के विधानसभा चुनाव की, तो उस दौरान अब तक की सबसे ज्यादा 189 महिलाएं चुनावी मैदान में थीं। जीत सिर्फ 24 को मिली है। हालांकि, बाद में ये आंकड़ा 27 हो गया था।
किस पार्टी की कितनी महिला उम्मीदवार?
इस पूरे डेटा को देख कर दो बातें सामने आती हैं। पहली ये कि चुनाव-दर-चुनाव राजस्थान में महिला उम्मीदवारों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन उनकी जीत के आकड़े में कुछ ज्यादा बढ़त नहीं हुई। महिला प्रत्याशियों और जीत करने वालीं महिला प्रत्याशियों के आंकड़े में अच्छा-खासा अंतर देखने को मिलता है।
वहीं पार्टीवार आंकड़ों पर नजर डाली जाए, साल 2018 यानि पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 200 सीटों में से कांग्रेस ने कुल 27 महिलाओं को टिकट दिया था। इनमें से 12 महिलाएं जीती थीं। भारतीय जनता पार्टी ने कुल 23 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया और सिर्फ 10 को ही जीत हासिल हुई।
वर्तमान में राजस्थान विधानसभा में कुल 27 महिला विधायक हैं। इसमें कांग्रेस से 15, बीजेपी से 10, एक विधायक RLP और निर्दलीय महिला विधायक सदन में है।
जानकारी के लिए बता दें कि 2018 के विधानसभा में 55 महिलाओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसमें से केवल एक को ही जीत मिली।
इसके अलावा अगर पिछले चुनाव में महिला वोटर्स की हिस्सेदारी की बात की जाए, तो दोनों ही बार महिलाओं ने रिकॉर्ड कायम किया है। 2013 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 75.44 थी, जबकि पुरुषों का मतदान 74.67% था।
इसी तरह 2018 में भी महिला वोटर पुरुष वोटर से आगे रहीं। तब महिलाओं मतदान 74.67 प्रतिशत और पुरुषों का मतदान 73.49 फीसदी था।