Rajasthan Election 2023: राजस्थान में BJP कांग्रेस के बागी मनाओं मोर्चों को नहीं मिल रही कामयाबी, बढ़ रहीं मुश्किलें

Rajasthan Election 2023: दोनों ही पार्टियों ने अब बागियों का मनाने का एक जैसा पैटर्न अपना लिया है। इसके तहत पार्टियां ये देख रही हैं कि कौनसा बागी उनके उम्मीदवार को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो पार्टियों ने मंगलवार को अपने प्रत्याशियों से ये फीडबैक लिया है कि किस बागी से उन्हें सबसे ज्यादा चुनौती मिल रही है और किसके जातीय समीकरणों से फायदा या नुकसान हो रहा है

अपडेटेड Nov 08, 2023 पर 2:05 PM
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Rajasthan Election 2023: राजस्थान में बीजेपी कांग्रेस के बागी मनाओं मोर्चों को नहीं मिल रही कामयाबी

Rajasthan Election 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव (Rajasthan Assembly Election) के लिए जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, वैसे ही बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) अपने बागी और नाराज नेताओं को मनाने की कवायद तेज कर रहे हैं। राज्य की 30 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां दोनों दोनों ही दलों को बगावत का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादा से ज्यादा इस संख्या को कम करने के लिए बीजेपी-कांग्रेस ने अपने-अपने वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारा है।

दोनों ही पार्टियों ने अब बागियों का मनाने का एक जैसा पैटर्न अपना लिया है। इसके तहत पार्टियां ये देख रही हैं कि कौनसा बागी उनके उम्मीदवार को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो पार्टियों ने मंगलवार को अपने प्रत्याशियों से ये फीडबैक लिया है कि किस बागी से उन्हें सबसे ज्यादा चुनौती मिल रही है और किसके जातीय समीकरणों से फायदा या नुकसान हो रहा है।

इसके जरिए पार्टियां ये देख रही हैं कि कौनसा बागी सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। फिर इसी के आधार पर उसे मनाने और डैमेज कंट्रोल की कवायद की जाएगी।


बीजेपी की इन बागियों पर खास नजर

  • चितौड़गढ़ से विधायक चंद्रभान सिंह आक्या
  • संचौर से जीवाराम चौधरी
  • झोटवाड़ा से राजपाल सिंह शेखावत
  • झोटवाड़ा से मुकेश गोयल
  • शिव से रविंद्र सिंह
  • कैलाश मेघवाल
  • बंशीधर बाजिया

कांग्रेस के लिए खतरा बन सकता हैं ये बागी

  • संगरिया से पूर्व विधायक डॉ. परमनवदीप
  • शिव से जिलाध्यक्ष फतेहखां
  • नागौर से पूर्व मंत्री हबीबुर्रहमान
  • सिवाना से जोनल इंचार्ज सुनील परिहार
  • लूणकरणसर, से पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल
  • जालोर से पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल
  • जौतारण से पूर्व संसदीय सचिव दिलीप चौधरी
  • मनोहर थाना से पूर्व विधायक कैलाश मीणा
  • अजमोर दक्षिण से PCC सदस्य हेमंत भाटी

भले ही दोनों राष्ट्रीय दल बागियों को मनाने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहे हों, दिग्गजों को मैदान में उतार रहे हों। लेकिन किसी भी पार्टी को फिलहाल तो कुछ खास सफलता मिलती दिख नहीं रही।

ऐसा इसलिए क्योंकि बागियों का सख्त तेवर दोनों ही दलों के बीच सबसे बड़ी रुकावट बन कर खड़ा है। जो नेता बगावत करने के बाद दूसरी पार्टी में चला गया और वहां से टिकट हासिल कर लिया, अब उसे मनाना तो काफी मुश्किल है। लेकिन कई नेता ऐसे हैं, जो निर्दलीय लड़ रहे हैं, नामांकन भर चुके हैं, चुनावी सभाएं और प्रचार भी करने लगे हैं। ऐसे नेताओं को शांत करने के लिए सिर्फ 9 नवंबर तक का ही समय बचा है।

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बीजेपी ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी को नाराज नेताओं को मनाने का जिम्मा सौंपा है, तो कांग्रेस ने अपने राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक को मैदान में उतारा है। इसके अलावा राज्य स्तर के नेता और पदाधिकारी भी अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो कुछ नाराज नेताओं ने आश्वासन तो दे दिया है कि वे भीतरघात नहीं करेंगे। कुछ साफ-साफ कह दिया है कि वे पार्टी उम्मीदवार के लिए काम नहीं करेंगे। इस स्थिति में न तो पार्टी और न ही पार्टी डैमेज कंट्रोलर...कोई भी आश्वस्त नहीं दिख रहा है।

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