Telangana Election 2023: वाईएसआरटीपी (YSRTP) पार्टी की अध्यक्षा वाईएस शर्मिला (YS Sharmila) ने गुरुवार को सभी अटकलों को विराम लगाते हुए ऐलान किया कि उनकी पार्टी अकेले तेलंगाना का विधानसभा चुनाव लड़ेगी। वह पिछले चार महीनों से कांग्रेस (Congress) पार्टी के साथ बातचीत कर रही थीं लेकिन ऐसा लगता है यह बात नहीं बन पाई। YS शर्मिला ने कहा कि उनकी पार्टी तेलंगाना की सभी 119 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। अगर वाईएस शर्मिला अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लेतीं या दोनों के बीच कोई समझौता होता, तो यह इस चुनाव में तेलांगाना का सबसे बड़ा राजनीतिक गठबंधन हो सकता था।
शर्मिला ने इसके साथ ही यह भी ऐलान किया कि वह खम्मम जिले की पलेयर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने जा रही हैं। उन्होंने कहा, “अगर जरूरत पड़ी तो मैं दूसरे विधानसभा से भी चुनाव लड़ूंगी। अगर हालात की मांग हुई तो मेरी मां विजयम्मा और पति अनिल भी चुनाव लड़ेंगे।"
YSRTP पार्टी की अध्यक्षा ने कहा कि वह पिछले 4 महीनों से कांग्रेस के साथ बात कर रही थीं, लेकिन यह बातचीत विफल रही। उन्होंने कहा, "मैं कांग्रेस के साथ जाना चाहती थी ताकि मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के खिलाफ सत्ता विरोधी वोटों का बंटवारा न हो सकें। मैं नहीं चाहती था कि वह दोबारा सीएम बनें और इसलिए इतने महीनों तक बातचीत का नतीजा आने का इंतजार कर रही थी। अब कोई हमें KCR के विरोधी वोटों के बंटवारे के लिए दोषी नहीं ठहरा सकता।"
वाईएस शर्मिला ने कांग्रेस के साथ समझौते के लिए दिल्ली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की थी। साथ ही उनके कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार से भी मुलाकात हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक उनकी संभावित एंट्री को लेकर तेलंगाना कांग्रेस दो खेमों में बंट गई थी। वाईएस शर्मिला के दिवंगत पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी, अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य में कांग्रेस के कद्दावार नेता थे। पार्टी में अभी भी ऐसे सदस्य हैं जो राजशेखर रेड्डी और उनके परिवार के प्रति काफी आदर रखते हैं। ये खेमा शर्मिला की एंट्री का समर्थन कर रहा था।
उनका कहना था कि शर्मिला के आने से पार्टी को उनके पिता से प्रभावित मतदाताओं को अपने साथ लाने में मदद मिलेगी। खासतौर से खम्मम जिले और उससे सटे इलाकों में, जिसे वाईएस राजशेखर रेड्डी का गढ़ माना जाता था। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में शर्मिला के भाई वाईएस जगन मोहन रेड्डी की अगुआई वाली पार्टी युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने खम्मम जिले की वायरा सीट जीती थी।
शर्मिला को एक ऐसी शख्सियत के रूप में देखा जा रहा था, जो महिलाओं और ईसाई वोटों दोनों को अपने साथ ला सकती थीं। हालांकि कांग्रेस का एक दूसरा धड़ा पार्टी में उनके आने या उनके साथ किसी तरह की गठबंधन का विरोध कर रहा था। YSRTP में भी कुछ लोग कथित तौर पर गठबंधन के खिलाफ थे। शर्मिला ने पहले कहा था कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने को तैयार हैं जो केसीआर फिर से मुख्यमंत्री बनते हुए नहीं देखना चाहता है।
YS शर्मिला ने 2021 और 2022 के बीच तेलंगाना में एक बड़ी पदयात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने करीब 3,000 किमी से अधिक की दूरी तय की। उनकी पूरी यात्रा में दो मुद्दे मुख्य तौर से छाए रहे। पहला, उनके पिता की सरकार के दौरान के सुनहरे दिन, जिसे उन्होंने वापस लाने का वादा किया है और दूसरा मौजूदा केसीआर सरकार में कथित भ्रष्टाचार।
यह भी दिलचस्प है कि राहुल गांधी ने हाल ही में तेलंगाना के खम्मम से ही प्रदेश में पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्होंने खम्मम में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए प्रदेश की केसीआर सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला था। हालांकि YS शर्मिला की एंट्री से खम्मम में अब कांग्रेस का चुनावी समीकरण बिगड़ सकता है और उसे कुछ सीटों पर झटका भी लग सकता है।