Akhurath Sankashti Chaturthi: 18 दिसंबर को है साल की आखिरी संकष्टी चतुर्थी, जानिए पूजा विधि, मुहूर्त, चंद्रोदय समय और भोग

Akhurath Sankashti Chaturthi2024: पौष महीने मे आने वाली संकष्टी साल की आखिर संकष्टी चतुर्थी होगी। यह 18 दिसंबर 2024 को मनाई जाएगी। पौष माह में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी (Akhurath Sankashti Chaturthi 2024) के नाम से जाता है। साथ ही अखुरथ संकष्टी चतुर्थी बुधवार के दिन पड़ रही है जो विशेष शुभ है

अपडेटेड Dec 17, 2024 पर 11:59 AM
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Akhurath Sankashti Chaturthi2024: संकष्टी चतुर्थी के दिन कई श्रद्धालु उपवास रखते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन करके अपना व्रत खोलते हैं।

हर महीने कृष्ण पक्ष चतुर्थी पर भक्त भगवान गणेश का उपवास रखते हैं। इसे संकष्टी चतुर्थी या संकट हारा चतुर्थी व्रत के नाम से जाना जाता है। ये व्रत, भगवान गणेश के उपासकों के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। मान्यता है इसके प्रताप से सुख, धन, वैभव और हर समस्या का समाधान मिलता है। पौष माह में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस साल अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर को मनाई जाएगी। यह इस साल की आखिरी संकष्टी चतुर्थी होगी। कहते हैं कि भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी परेशानियों और विघ्नों को हर लेते हैं। इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है।

उदयातिथि के अनुसार, साल की आखिरी संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि की शुरुआत 18 दिसंबर को सुबह 10.06 बजे से होगी। इस तिथि समापन 19 दिसंबर को सुबह 10.02 बजे होगा। संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा को अर्घ्य रात 8.27 बजे दिया जाएगा।

अखुरथ संकष्टी पूजन विधि


इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। फिर साफ सुथरे कपड़े पहनें। पूजा घर के ईशान कोण में एक चौकी रखें। उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें। सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजन विधि शुरू करते हुए गणेश जी को जल, दूर्वा, अक्षत, पान अर्पित करें। भगवान गणेश की उपासना मंत्रों और जाप के साथ करें। संध्याकाल में भगवान गणेश की पूजा करें और उसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न करें। पूजा करने के लिए सबसे पहले भगवान गणपती का शुद्ध जल से अभिषेक करें। पूजन के दौरान भगवान गणेश की कथा पढ़ें और दूसरों को भी सुनाएं। आरती कर पूजा का समापन करें। उन्हें भोग लगाएं। इसके लिए गन्ने की खीर बेहद शुभ मानी गई है। चंद्रोदय के समय चंद्र देवता के दर्शन करें। फिर व्रत का पारण करें।

इन मंत्रों का करें जाप

1 - गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।

उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पंकजम्।।

2 - ॐ गं गणपतये नमः

3 - गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।

4 - श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥

5 - ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा

6 - ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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