जोमैटो के बाद स्विगी ने भी दिया झटका, प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी; खाना मंगाना अब और हुआ महंगा

Swiggy Platform Fee Hike: नई बढ़ोतरी के साथ स्विगी और जोमैटो दोनों की प्लेटफॉर्म फीस अब एक बराबर हो गई है। साल 2023 में महज ₹2 से शुरू हुई यह फीस अब ₹17 के पार पहुंच चुकी है, जो पिछले एक साल में हुई लगातार बढ़ोतरी का नतीजा है

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 4:03 PM
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पिछले 7 महीनों के भीतर स्विगी ने चौथी बार अपने प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है

Swiggy Raised Platform Fee: अगर आप भी ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं तो आपके लिए बुरी खबर है। जोमैटो के बाद अब स्विगी ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस में करीब 17 प्रतिशत का इजाफा कर दिया है। यानी फूड ऑर्डर करना अब और महंगा होने जा रहा है। वैसे आपको बता दें कि पिछले 7 महीनों के भीतर स्विगी ने चौथी बार अपने प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है।

अब कितना देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज?

Swiggy: कंपनी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस को ₹14.99 से बढ़ाकर ₹17.58 कर दिया है।


Zomato: जोमैटो भी फिलहाल ₹17.58 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रहा है। इसमें ₹14.90 बेस फीस है और ₹2.68 जीएसटी जोड़ा जाता है।

नई बढ़ोतरी के साथ स्विगी और जोमैटो दोनों के प्लेटफॉर्म फीस अब एक बराबर हो गई है। साल 2023 में महज ₹2 से शुरू हुई यह प्लेटफॉर्म फीस अब ₹17 के पार पहुंच चुकी है, जो पिछले एक साल में हुई लगातार बढ़ोतरी का नतीजा है।

कंपनियां क्यों बढ़ा रही हैं फीस?

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के लिए प्लेटफॉर्म फीस अब कमाई का एक बड़ा जरिया बन गई है। रेस्टोरेंट मालिक अब कमीशन बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, ऐसे में कंपनियां अपना मार्जिन बढ़ाने के लिए सीधे ग्राहकों से चार्ज वसूल रही है। जोमैटो और स्विगी मिलकर रोजाना करीब 43 से 45 लाख ऑर्डर प्रोसेस करते हैं। ऐसे में महज 2-3 रुपये की बढ़ोतरी भी सालाना करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व जनरेट करती है। एक अनुमान के अनुसार, ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियां प्लेटफॉर्म फीस के जरिए सालाना ₹3,500 से ₹4,000 करोड़ की कमाई कर रही हैं।

7 महीने में 4 बार बढ़े दाम

सितंबर 2025 में जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर ₹12 की थी। इसके बाद त्योहारी सीजन की भीड़ के दौरान स्विगी ने भी इसे बढ़ाकर ₹14 किया। अब एकबार फिर से जोमैटो ने अपनी बेस फीस ₹12.5 से 19% बढ़ाकर ₹14.9 की। स्विगी ने भी अपनी फीस ₹14.99 से बढ़ाकर ₹17.58 कर दी है।

सिर्फ फूड डिलीवरी ही नहीं, बल्कि अब फैशन, ई-कॉमर्स और टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी इस तरह की छोटी-छोटी फीस लेना एक स्टैंडर्ड बन गया है। कंपनियां अपने ऑपरेटिंग खर्चों को मेंटेन करने के लिए इन 'इन्क्रीमेंटल चार्जेस' का सहारा ले रही हैं।

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