G20 summit: जी20 शिखर सम्मेलन (G20 leadership summit) की तारीख नजदीक आने के साथ ही राजधानी दिल्ली के सभी फाइव स्टार होटलों में 100% बुकिंग देखने को मिल रही है, जबकि कमरों के किराए में 400 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी हुई है। 18वें जी20 समिट का आयोजन राजधानी दिल्ली स्थित प्रगति मैदान के कन्वेंशन कॉम्प्लेक्स में 9 और 10 सितंबर को होगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे।
होटलों की बुकिंग में भारी बढ़ोतरी
राजधानी दिल्ली के ज्यादातर प्रीमियम होटलों में 6 सितंबर से 11 सितंबर तक की बुकिंग पहले से ही फुल है। इन होटलों में ताजमहल (Taj Mahal), ताज पैलेस (Taj Palace), आईटीसी मौर्या शेरेटन (ITC Maurya Sheraton), ली मेरिडियन (Le Meridien, शांग्रीला (Shangri-La), द ललित (The Lalit), इंपीरियल (Imperial), ओबेरॉय (Oberoi) और लीला (Leela) शामिल हैं। इसके अलावा, द क्लैरिजेज (The Claridges), इरोज (Eros), प्राइड होटल (Pride Hotel) में 8-10 सितंबर के बीच 100% बुकिंग है।
फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी के कंसल्टिंग सीईओ (Consulting CEO) आशीष गुप्ता ने बताया, 'जी-20 गतिविधियों की वजह से दिल्ली के होटलों में बुकिंग पहले ही बढ़नी शुरू हो गई है। जी-20 सम्मेलन के दौरान होटलों की बुकिंग में पिछले महीने के मुकाबले 30-50 पर्सेंट की बढ़ोतरी होगी।'
सभी प्रीमियम होटलों में किराए की दरें दोगुनी हो गई हैं, जबकि कई जगहों पर कमरों के किराये में 4 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। ईजमाइट्रिप (EaseMyTrip) के को-फाउंडर और CEO निशांत पित्ति (Nishant Pitti) ने बताया, 'जी-20 की वजह से दिल्ली में होटल ऑक्युपेंसी एक दशक के हाई लेवल (70-72 पर्सेंट) पर है।'
उनके मुताबिक, जी-20 समिट के दौरान तकरीबन सारी बुकिंग फुल हो चुकी है और कुछ प्रीमियम होटलों में काफी कम रूम बचे हैं और इनका किराया भी काफी ज्यादा हो गया है। उदाहरण के तौर पर ली मेरेडियन में एक कमरे का किराया 60,000 रुपये रोजाना है, जबकि यही रूम अगस्त में 15,000 रुपये से भी कम में उपलब्ध है।
थ्री और फोर स्टार होटलों के किराए में भी बढ़ोतरी हुई है। होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HAI) के सेक्रेटरी जनरल एम पी बेजबरुआ ने बताया, 'यह डिमांड-सप्लाई का मसला है। डिमांग काफी ज्यादा बढ़ गई है, जबकि सप्लाई पहले जैसी है।'