अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी एपल ने पिछले हफ्ते दिल्ली हाईकोर्ट में एक जवाब (रिज्वाइंडर) फाइल किया। उसने इसमें कहा कि कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने पेनाल्टी लगाने के मकसद से 'टर्नओवर' का मतलब 'ग्लोबल टर्नओवर' लगाया है, जो असंवैधानिक है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी।
सीसीआई ने एपल के खिलाफ 2021 में शुरू की थी जांच
Apple ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका फाइल कर सीसीआई को उसके ग्लोबल फाइनेंशियल रिकार्ड मांगने से रोकने की गुजारिश की थी। सीसीआई ने एपल के खिलाफ 2021 में जांच शुरू की थी। उसने जांच के दौरान एपल से उसके ग्लोबल फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स की जानकारी देने को कहा था।
एपल ने सीसीआई एक्ट में संसोधन को चैलेंज किया है
अमेरिकी टेक कंपनी ने कॉम्पिटिशन एक्ट, 2002 में 2024 के संसोधन को चुनौती दी है। इस संसोधन के जरिए इस एक्ट में सेक्शन 27(बी) जोड़ा गया था। यह सेक्शन सीसीआई को उन कंपनियों पर पेनाल्टी लगाने का अधिकार देता है, जिन्हें एंटी-कॉम्पटिटिव प्रैक्टिसेज में शामिल पाया गया है। सीसीआई पिछले तीन सालों में कंपनी के ग्लोबल टर्नओवर का 10 फीसदी पेनाल्टी लगा सकता है।
एपल को चुकानी पड़ सकती है 3,41,295 करोड़ पेनाल्टी
एपल की दलील है कि इस संसोधन से उसे करीब 3,41,295 करोड़ रुपये की पेनाल्टी चुकानी होगी। इसका कैलकुलेशन FY22, FY23 और FY24 के तीन सालों में कंपनी के ग्लोबल टर्नओवर के आधार पर किया गया है। एपल ने दिल्ली हाईकोर्ट को अपने जवाब में कहा है कि टर्नओवर का मतलब ग्लोबल टर्नओवर निकालना ठीक नहीं है। उसने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक्सेल क्रॉप से जुड़े मामले में इसे 'संबंधित टर्नओवर' (relevant turnover) कहा था।
एपल की दलील-दिल्ली हाईकोर्ट ने टर्नओवर का गलत मतलब निकाला
अमेरिकी कंपनी की दलील है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने टर्नओवर का जो मतलब निकाला है वह एक्सेल क्रॉप मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरी तरह से अनादर है। उसने यह भी कहा है कि इस तरह का संसोधन कर सीसीआई ने एक तरह से एक्सेल क्रॉप मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमान्य कर दिया है। यह भारत के संविधान के आर्टिकल 50 में शामिल सेपेरेशन ऑफ पावर के सिद्धांत का उल्लंघन है।