दलाल स्ट्रीट में खून की होली, जानिये निफ्टी और सेंसेक्स को लहूलुहान करने वाले चार फैक्टर्स

17 दिसंबर को FII ने कैश मार्केट में शुद्ध रूप से 2,069 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

अपडेटेड Dec 20, 2021 पर 3:00 PM
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सेंसेक्स, निफ्टी, बैंक निफ्टी सब धड़ाम

घरेलू इक्विटी बाजार आज यानी 20 दिसंबर की शुरुआत से ही फ्रीफॉल में दिखे और दोनों बेंचमार्क इंडेक्स एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ खुले। जबकि निफ्टी50 1.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,653 अंक के निचले स्तर पर पहुंच गया, रोक-टोक के बिना बिकवाली के चलते सेंसेक्स लगभग 1,100 अंक या 1.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55922.58 पर पहुंच गया।

निफ्टी मिडकैप 100 में 3.1 अंक और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ ब्रॉडर मार्केट पर गहरा असर पड़ा।

वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX आज 10 फीसदी उछलकर 18.02 के स्तर पर पहुंच गया।

20 दिसंबर को IT सहित सभी सेक्टर लहुलुहान दिखे। निफ्टी आईटी, जो शुक्रवार को इंडस्ट्री की अपबीट डिमांड के चलते बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा था, उसमें भी निगेटिव सेंटीमेंट के कारण गिरावट नजर आई। मेटल्स, रियल एस्टेट और फाइनेंशियल शेयर बेंचमार्क इंडेक्स को नीचे खींच रहे थे। निफ्टी बैंक जहां 2.7 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 2.8 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स 3 प्रतिशत गिर गया।


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इन चार फैक्टर्स ने बाजार को घायल कर दिया

ओमीक्रॉन के बढ़ने की चिंता (Omicron concerns)

कोविड -19 के तेजी से फैलने वाले इस वैरिएंट ने निवेशकों को डराना जारी रखा क्योंकि यूरोप के अधिकांश देश इसको नियंत्रित करने के लिए परेशान रहे। मार्केट एस्कपर्ट्स का मानना ​​​​है कि सामान्य होती वैश्विक अर्थव्यवस्था के ठीक एक साल बाद एक और सख्त लॉकडाउन की संभावना आर्थिक सुधार को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

वहीं नीदरलैंड ने त्योहारों के मौसम के ठीक बीच में "दर्दनाक" लॉकडाउन लगाया है। जबकि यूके ने पहले ही यात्रा प्रतिबंध लगा दिए थे और जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देश अपनी नवीनतम कोविड लहरों से उबर रहे थे।

ग्लोबल स्पिलऑफ (Global spilloff(दुनिया भर के बाजारों में गिरावट)

वॉल स्ट्रीट शुक्रवार को निचले स्तर पर बंद हुआ जबकि सभी तीन प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स फेड द्वारा बुधवार को मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए 2022 के अंत तक तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत के बाद गिरावट के साथ बंद हुए।

वहीं 20 दिसंबर एशियाई सूचकांक गिर गए और ओमीक्रोन की चिंताओं के कारण यूरोप में कड़े प्रतिबंधों के कारण तेल की कीमतें गिर गईं।

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केंद्रीय बैंकों की सख्त नीति (Central banks’ policy tightening)

वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों के कठोर रुख ने भी एशिया में इक्विटी बाजारों पर असर डाला है। फेड ने महामारी के दौरान प्रोत्साहन देने के अपने रुख से पीछे हटने का विचार व्यक्त किये जाने पर कई केंद्रीय बैंकों ने अपने-अपने देशों में मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए दरें बढ़ाई हैं।

बैंक ऑफ इंग्लैंड गुरुवार को COVID-19 महामारी शुरू होने के बाद से ब्याज दरें बढ़ाने वाला पहला प्रमुख केंद्रीय बैंक बन गया। नॉर्वे ने इस साल दूसरी बार 16 दिसंबर को COVID प्रतिबंधों के विस्तार के बावजूद दरें बढ़ाईं, जबकि रूस ने इस साल 17 दिसंबर को सातवीं बार अपनी नीतिगत दर बढ़ाई। न्यूजीलैंड ने भी पिछले महीने अपनी ब्याज दर बढ़ा दी थी और कनाडा ने सुझाव दिया है कि वह जल्द ही दरे बढ़ायेगा

FII की लगातार बिकवाली (Continuous FII selling)

विकसित बाजारों में केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतियों को सख्त करने के परिणामस्वरूप भारत और अन्य उभरते बाजारों में एफआईआई द्वारा बेरोकटोक और लगातार बिकवाली देखने को मिली है। केवल दिसंबर महीने में FII ने कैश मार्केट में 26,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिकवाली की जो इस साल एक महीने में की गई सबसे अधिक बिक्री है।

17 दिसंबर को उन्होंने कैश मार्केट में शुद्ध रूप से 2,069 करोड़ रुपये की बिक्री की।

 

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