वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने 2 फरवरी को साफ किया कि बजट 2026-27 में किए गए कस्टम ड्यूटी बदलाव अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये बदलाव भारत सरकार की अपनी नीति का हिस्सा हैं और लंबे समय से लगातार किए जा रहे हैं।
नेटवर्क18 ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार पिछले कई वर्षों से हर बजट में कस्टम ड्यूटी की समीक्षा करती आ रही है। उन्होंने कहा, 'हम काफी समय से हर बजट में कस्टम ड्यूटी में बदलाव करते रहे हैं और इस बजट में भी उसी प्रक्रिया को जारी रखा गया है।'
US टैरिफ का असर बजट में नहीं जोड़ा गया
वित्त मंत्री ने कहा कि कस्टम ड्यूटी में किए गए बदलाव एक बड़े नीति फ्रेमवर्क का हिस्सा हैं। इनका मकसद भारतीय नागरिकों और घरेलू कारोबार को राहत देना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये फैसले किसी बाहरी देश की नीतियों को देखकर नहीं लिए गए हैं।
वित्त मंत्री ने दो टूक कहा कि बजट तैयार करते वक्त अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के संभावित असर का कोई आकलन नहीं किया गया। उन्होंने कहा, 'हमने अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को बजट के फैसलों में शामिल नहीं किया।'
MSME और रोजगार देने वाले सेक्टर्स पर जोर
वित्त मंत्री के मुताबिक, कस्टम ड्यूटी में बदलाव और अन्य नीतिगत कदम खास तौर पर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए किए गए हैं। इनमें माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) शामिल हैं, जो देश में सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करते हैं।
मरीन, लेदर और टेक्सटाइल सेक्टर को राहत
1 फरवरी को पेश बजट 2026-27 में मरीन प्रोडक्ट्स, लेदर और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर्स के लिए कई राहत उपायों का ऐलान किया गया। ये सेक्टर्स 2025 के मध्य से अमेरिका की ओर से लगाए गए 50 प्रतिशत तक के ऊंचे टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं।
बजट में कस्टम ड्यूटी पर बड़े ऐलान
बजट में वित्त मंत्री ने कई अहम कस्टम ड्यूटी बदलावों की घोषणा की। इनमें शामिल हैं:
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा
इसके अलावा बजट में लिथियम-आयन बैटरी और न्यूक्लियर पावर जैसे सेक्टर्स के लिए कैपिटल गुड्स पर दी जा रही छूट को आगे बढ़ाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, एविएशन और डिफेंस सेक्टर के कंपोनेंट्स पर टैरिफ में रियायत देकर सरकार घरेलू उद्योग को मजबूत करने और निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।